Sunday, 2 August 2020

कलम की सुगंध द्वारा 14 एकल संग्रहों का लोकार्पण


          बड़े ही हर्ष का विषय है कि कलम की सुगंध छंदशाला परिवार की संचालक *आ. अनिता मंदिलवार जी* के संपादन में *अन्तरा शब्दशक्ति प्रकाशन* से डॉ. प्रीति समकित सुराना द्वारा प्रकाशित 14 कुण्डलियाँ एकल संग्रहों का विमोचन एक साथ हो रहा है कवि परिवार के लिए यह प्रथम अवसर है कि एकसाथ इतनी पुस्तकों का लोकार्पण किया जाना तय हुआ इस आयोजन से जुड़े सभी घटक महत्वपूर्ण हैं किसी का नाम छूट जाए तो क्षमा करेंगे। आइये शुरू करते हैं लोकार्पण समारोह अतिथि देवीभवः आदरणीया डॉ. प्रीति समकित सुराना जी का स्वागत है अपने कर कमलों से इस पुनीत पावन कार्यक्रम को गति प्रदान कर आयोजन को सफल बनायें 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐


*कुण्डलियाँ शतकवीर के आज एक साथ 14 एकल संकलन प्रकाशित हो रहे हैं*

*सरोज की कुण्डलियाँ*
कवयित्री :-
            सरोज दुबे 'विधा'
आपको ढेरों बधाई एवं शुभ कामनाएं 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

 *लक्षिता*
कवयित्री :-
             राधा तिवारी "राधेगोपाल"
आपको ढेरों बधाई एवं शुभ कामनाएं 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

*राम नाम रस भीनी कुण्डलियाँ*
कवयित्री :-
            गीतांजलि मित्तल 'विधायनी'
आपको ढेरों बधाई एवं शुभ कामनाएं 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

 *मन श्री कुंडलिया*
कविवर :-
             कमल किशोर कमल
आपको ढेरों बधाई एवं शुभ कामनाएं 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

*जीवन आख्या*
कवयित्री :-
              अनिता सुधीर 'आख्या'
आपको ढेरों बधाई एवं शुभ कामनाएं 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

*मन की वीणा*
कवयित्री :-
              कुसुम कोठारी 'प्रज्ञा'
आपको ढेरों बधाई एवं शुभ कामनाएं 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

*पयस्विनी कुण्डलिया शतक*
कविवर :-
             संतोष कुमार प्रजापति
आपको ढेरों बधाई एवं शुभ कामनाएं 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

*मेरी कुण्डलियाँ*
कवयित्री :-
            डॉ.सरला सिंह ''स्निग्धा''
आपको ढेरों बधाई एवं शुभ कामनाएं 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

*हाँ! मैं आत्मा हूँ*
कवयित्री :-
              रंजना श्रीवास्तव
आपको ढेरों बधाई एवं शुभ कामनाएं 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

*सुवासिता की यात्रा*
कवयित्री :-
             चमेली कुर्रे 'सुवासिता'
आपको ढेरों बधाई एवं शुभ कामनाएं 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

 *त्रिपथगा*
कवयित्री :-
              हेमलता शर्मा 'मनस्विनी'
आपको ढेरों बधाई एवं शुभ कामनाएं 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

 *निरंतर की साधना*
कवयित्री :-
              अर्चना पाठक "निरन्तर'
आपको ढेरों बधाई एवं शुभ कामनाएं 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

*गुल की कुंडलियाँ*
कवयित्री :-
                 धनेश्वरी सोनी गुल
आपको ढेरों बधाई एवं शुभ कामनाएं

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*कुण्डलिया शतकवीर* में भी एक कवयित्री का एक और संकलन प्रकाशित हुआ है

*राधे की कुण्डलिया*
कवयित्री :-
            राधा तिवारी "राधेगोपाल"
आपको ढेरों बधाई एवं शुभ कामनाएं 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

विश्वास है सभी रचनाकार इस पावन अवसर पर उपस्थित होंगे आप सभी को लगातार 50 दिन तक निरन्तर सृजानत्मक श्रम का सुखद परिणाम आज कुण्डलियाँ संकलन के रूप में प्राप्त हो रहा है सभी को मंच और परिवार की तरफ से ढेरों बधाइयाँ एवं शुभकामनाएं 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

अब
*अन्तरा शब्दशक्ति प्रकाशन*
     और आप सभी की पुस्तक प्राकशित कर चुकी आदरणीया डॉ. प्रीति समकित सुराना जी आप मंच पर आइये और सभी साथियों की ई-पुस्तक और ई-स्मृति चिन्ह अपने हाथों से वितरित कर सभी का मान बढाइये, आपके द्वारा की गई मेहनत निःसन्देह प्रशंसनीय है स्वागत है डॉ. प्रीति समकित सुराना जी 💐💐💐

Monday, 20 July 2020

तपती धरती : भरत नायक 'बाबूजी'


कविवर भरत नायक 'बाबूजी' एक ऐसा नाम जो साहित्य जगत में किसी भी परिचय का मोहताज नहीं है। साहित्य की शीतल धारा उनकी लेखनी से प्रस्फुटित होकर इस प्रकार बह कर निकलती है कि पाठक मंत्र मुग्ध पड़ता सा उसमें स्नान करता सा प्रतीत होता है। आज हम उन्हीं की एक रचना को आप सभी के समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं 

*"संक्षिप्त जीवन परिचय"*-
1- नाम- भरत नायक "बाबूजी"
2- माता का नाम- स्व. चम्पादेवी नायक
 पिता का नाम- स्व. अभयराम नायक
सहधर्मिणी का नाम- श्रीमती राजकुमारी नायक
संतान- श्रीमती रजनी बाला चौधरी (बडी- पुत्री)
दुष्यंत कुमार नायक (छोटा- पुत्र)
3- स्थाई पता- लोहरसिंह, रायगढ़ (छ.ग.), पिन- 496100
4- मो. नं.- 9340623421
5- जन्म तिथि- 11- 06- 1956
जन्म स्थल- लोहरसिंह, रायगढ़ (छ.ग.)
6- शिक्षा- स्नातकोत्तर (हिंदी, समाज शास्त्र), बी. टी., रत्न
7- व्यवसाय- सेवा निवृत्त व्याख्याता
8- प्रकाशित रचनाओं की संख्या- पंच शताधिक
9- प्रकाशित पुस्तकों की संख्या- साझा संकलन- तीस, एकल- एक ("भोर करे अगवानी"- छत्तीसगढ़ी कविता संग्रह)
10- काव्य पाठ का विवरण- दिल्ली सहित देश के विभिन्न भागों के सैकड़ों मंचों पर काव्य पाठ अध्यक्षता, मुख्य आतिथ्य,विशेष आतिथ्य एवं आकाशवाणी से प्रसारण।
11- सम्मान का विवरण- छ. ग. शासन, प्रशासन एवं भा. द. सा. अकादमी नयी दिल्ली से डॉ. अम्बेडकर फैलोशिप  सम्मान, अखिल भारतीय राष्ट्रीय कवि संगम छत्तीसगढ़ इकाई से वरिष्ठ साहित्यकार दिनकर सम्मान के साथ शताधिक  विभिन्न सम्मान एवं अभिनंदन ।
12- लेखन- हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी भाषा में स्वतंत्र लेखन।
प्रतिनिधित्व- नवोन्मेष रचना मंच घरघोड़ा, रायगढ़ का संस्थापक अध्यक्ष, कला कौशल साहित्य संगम छत्तीसगढ़ का संस्थापक/अध्यक्ष, भरत साहित्य मंडल, लोहरसिंह, रायगढ़(छ.ग.) का संस्थापक, अनेक साहित्यिक पटलों एवं साहित्यानुरागियों का मार्गदर्शन।
13- Email ID- bharatlalnaik3@gmail.com

संकलन कर्त्ता 
नीतू ठाकुर विदुषी

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*"तपती धरती तपस्विनी सी, ताक रही है अंबर को"*
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(लावणी छंद गीत)
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विधान- १६,१४ मात्राओं के साथ ३० मात्रा प्रतिपद। पदांत लघु गुरु का कोई बंधन नहीं। युगल पद तुकबंदी।
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●धरा कहे सरसा दो जल से, वासव! मम उर-अंतर को।
तपती धरती तपस्विनी सी, ताक रही है अंबर को।।
नीर-दान दे आज सँवारो, मेरे तन-मन जर्जर को।
तपती धरती तपस्विनी सी, ताक रही है अंबर को।।

●मेरा तप कब होगा पूरा? हे घनवाहन! बतलाना।
खंजर-दाघ-निदाघ भोंक अब, छलनी और न करवाना।।
व्याकुल होकर आज धरा है, करे पुकार पुरंदर को।
तपती धरती तपस्विनी सी, ताक रही है अंबर को।।

●कृष्ण-मेघ बरसोगे कब तुम? मुझको कब सरसाओगे?
तृषित चराचर चित चिंतन को, बोलो कब हरसाओगे??
करो वृष्टि अब सृष्टि तृप्त हो, रच भू-गगन स्वयंबर को।
तपती धरती तपस्विनी सी, ताक रही है अंबर को।।

●नित उजाड़ शृंगार धरा का, हरियाली को तरसेंगे।
बची रहेगी अटवी अपनी, बादल भी तब बरसेंगे।।
देखे मन मारे महि-मीरा, अपने अंबर-गिरधर को।
तपती धरती तपस्विनी सी, ताक रही है अंबर को।।

●जीव जंतु नग नदियाँ घाटी, तरस रहे हैं पानी को।
प्रतिबंधित अब करनी होगी, मानव की मनमानी को।।
ताप नित्य बढ़ता है वैश्विक, ज्ञान गहो अब उर्वर को।
तपती धरती तपस्विनी सी, ताक रही है अंबर को।।

●आये दिन यह मानसून भी, अब धोखा दे जाता है।
हाल हुआ है बद से बदतर, फाँसी कृषक लगाता है।।
त्राहिमाम भू कहती "नायक", पुकारती है ईश्वर को।
तपती धरती तपस्विनी सी, ताक रही है अंबर को।।
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भरत नायक "बाबूजी"
लोहरसिंह, रायगढ़(छ.ग.)
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@kalam_ki_sugandh

Thursday, 11 June 2020

कलम की सुगंध अंतरराष्ट्रीय लाइव कवि सम्मेलन का समापन



*प्रेस - विज्ञप्ति*

अंतरराष्ट्रीय लाइव कवि सम्मेलन का समापन 

कोरोना भारत बंद के समय से अर्णव कलश एसोसिएशन के राष्ट्रीय सहित्यिक मिशन कलम की सुगंध के फेसबुक पर लाइव कवि सम्मेलन का अवसर दिया जो दो ग्रुप में संचालित किया गया कलम की सुगंध सृजनशाला और कलम की सुगंध छंदशाला ग्रुपों के माध्यम से सैकड़ों कवियों को काव्य पाठ का अवसर दिया गया जिसमें प्रतिष्ठित कवि से लेकर नवोदित कवियों को भी काव्य पाठ का अवसर मिला।  कार्यक्रम का उद्घाटन सत्र, डॉ. अनिता भारद्वाज अर्णव जी ने अपने  शुभकमना संदेश तथा  काव्य पाठ से प्रारम्भ किया तो वहीं समापन सत्र में भारतीय हिन्दी साहित्य जगत के एक सशक्त हस्ताक्षर डॉ. कुँवर बेचैन जी के काव्य पाठ से कल रात्रि 8 से 9 बजे समा बांधती हुई प्रस्तुति के साथ सम्पन्न हुआ है। आज 11 बजे से लेकर 12 बजे तक अर्णव कलश के राष्ट्रीय साहित्यक मिशन कलम की सुगंध के संस्थापक संजय कौशिक विज्ञात ने सभी कवियों के आभार में दो-दो पंक्तियों की कविता कही और अंत में कुछ गीत और मुक्तक के साथ कार्यक्रम का समापन किया। 
लाइव कवि सम्मेलन में एक घण्टे की काव्य प्रस्तुति के लिए हरियाणा ग्रन्थ अकादमी के उपाध्यक्ष महोदय वीरेंद्र सिंह चौहान, कवि महेंद्र जैन हिसार, महेंद्र बिलोटिया, सुशीला जोशी विद्योत्तमा मुज्जफरनगर, दरभंगा बिहार से बिनोद हँसोड़ा, हास्य कवि सुरेंद्र यादवेंद्र राजस्थान, अमेरिका से गीतांजलि विधायनी, सरोज दुबे विधा, चमेली कुर्रे सुवासिता, और विजेंदर ग़ाफ़िल के साथ साथ नवोदित लक्ष्य कौशिक, सुमित कौशिक, ध्रुव कौशिक, चेतन भारद्वाज आदि की प्रस्तुति मनमोहक रही। अर्णव के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरु जी रमेश चंद्र कौशिक ने बताया कि संजय कौशिक विज्ञात के संयोजन और विदुषी के संचलन में यह कार्यक्रम सफल रहा। डॉ. अनिता भारद्वाज अर्णव इस कार्यक्रम में सह संचालन और सह संयोजन का प्रभार निभाती दिखी। इस प्रकार से एक सफल संदेश कोरोना भारत बंदी के समय घरों में रहिये सुरक्षित रहिये को बल देने का प्रयास सफल सिद्ध हुआ। अभी कलम की सुगंध छंदशाला ग्रुप अनिता मंदिलवार सपना के संयोजन और तोषण कुमार दिनकर के संचालन में 30 जून तक चलेगा यह लाइव कवि सम्मेलन कार्यक्रम।

इस अवसर पर आदरणीय संजय कौशिक विज्ञात जी ने कहा.....
सादर नमस्कार प्रणाम मित्रों । बड़े हर्ष का विषय है कि आप विद्वत समाज के सहयोग से कलम की सुगन्ध सृजनशाला ने कठिन समय को विचारों की प्रस्तुति से सहजता का  आभास कराया । आदि शक्ति स्वरूपा माताओं, बहनों ,बेटियों से सुसज्जित परिवार ने मनोयोग से कार्यक्रम को गति प्रदान करने में  सहयोग दिया ,मित्रों, ये कार्यक्रम ,कलम की सुगंध के दो समूहों में चलाया गया है दूसरे  समूह छंदशाला से भी उत्साह की छवि निरन्तर निखरती चली आ रही है । सृजनशाला के लाइव कवियों, सृजनकर्ताओं  का मैं हृदय की गहराइयों से आभार व्यक्त करता हूँ। कार्यक्रम का उद्घाटन सत्र, डॉ. अनिता भारद्वाज अर्णव जी ने अपने  शुभकमना संदेश तथा  काव्य पाठ से प्रारम्भ किया तो वहीं समापन सत्र में भारतीय हिन्दी साहित्य जगत के एक सशक्त हस्ताक्षर कुँवर बेचैन जी के काव्य पाठ से कल रात्रि 8 से 9 बजे समा बांधती हुई प्रस्तुति के साथ सम्पन्न हुआ है। कार्यक्रम अपने चरम बिंदु पर आकर समाप्त किया गया है। जबकि कवि परिवार के लगभग 100 हस्ताक्षर पंक्ति बद्ध थे जिनकी प्रस्तुति शेष थी जिनमें कुछ बड़े नाम कुछ नवोदित हैं। उनके लिए अलग से कोई योजना बनाई जाए परिवार से विनम्र निवेदन है। उन्हें अवसर अवश्य दिया जाना चाहिए। अपने इस सफल कार्यक्रम की मध्य अवधि में, उत्तरांचल से भूषण जी, सुशीला जोशी जी,वीरेंदर सिंह चौहान जी हरियाणा, महेन्द्र जैन जी हरियाणा ने अपने विचारों से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध किया। जैसा कि आप सबको विदित है कि अनेक बड़े हस्ताक्षर आये और अनेक नवांकुरों को भी मंच पर काव्य पाठ अवसर मिल सका। आज आप सभी का हार्दिक आभार प्रकट करने का आदेश कलम की सुगंध परिवार द्वारा मुझे प्राप्त हुआ है। जिसकी अनुपालना करते हुए मैं अग्रिम पंक्तियों के साथ  आपका आभार व्यक्त करता है।

सर्वप्रथम डॉ. अनिता भारद्वाज अर्णव जी आपका हार्दिक आभार आपने बहुत सुंदर काव्य पाठ किया इन दो पंक्तियों के साथ कलम की सुगंध परिवार आपका हार्दिक आभार कहता है

1
अर्णव का कौशल करे, अर्णव सी शुरुआत।
उत्तम नेक विचार ही, हरे तिमिर की रात।।। 
 
तो अग्रिम प्रस्तुति मशहूर ग़ज़लकार फिरोज खान जी की रही आपके आभार में प्रस्तुत हैं दो पंक्तियाँ         
2
रख्खे कलम फिरोज जब, खिल उठते हैं शेर।
और ग़ज़ल निखरी लगे, चमक उठे वो फेर।।


अग्रिम प्रस्तुति से मंच को मंत्रमुग्ध कर देने वाली कवयित्री आदरणीया सुशीला जोशी जी परिवार की तरफ से आपका हार्दिक आभार
3
मधुर काव्य विद्योत्तमा, काव्य सहित अनुवाद।
खण्ड काव्यमय पाठ की, गूँजे चहुँ दिश नाद।।

कविवर महेंद्र सिंह बिलोटिया जी आपका हार्दिक आभार इन 2 पंक्तियों के साथ किया जाता है
4
बोली ये हरियाणवीं, जिनके मुख के बोल।।
सुंदर कहें बिलोटिया, काव्य रसों को घोल।।

कवयित्री पूनम दुबे वीणा जी इन दो पंक्तियों के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है
5
जैसे वीणा गूँजती, गूँजे उत्तम राग।
पूनम स्वर ऐसे लगें, कूके कोयल बाग।।

कवयित्री ऋतु कौशिक जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
6
काव्य सशक्त प्रवाह हो, कविता का ये काम।
काव्य पाठ मोहक करे, ऋतु कौशिक है नाम।।

कविवर पंकज अंगार जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका हार्दिक आभार प्रकट किया जाता है।
7
सब रस की कविता कहें, मुख्य रहे शृंगार।
युवा हृदय की धड़कने, समझें सब अंगार।।

माननीय कविवर वीरेंद्र चौहान जी उपाध्यक्ष हरियाणा ग्रन्थ अकादमी इन 2 पंक्ति के साथ आपका हार्दिक आभार प्रकट किया जाता है।
8
उत्तम गुण पहचान के, करते उत्तम काव्य।
कवि कुल में चौहान जी, श्रेष्ठ रहें संभाव्य।।

लाइव कार्यक्रम समापन के अंतिम दिवस आप सभी की उपस्थिति प्रशंसनीय है हार्दिक वंदन अभिनंन्द
के साथ चलते हैं हिन्दी काव्य के अग्रिम सशक्त हस्ताक्षर
कविवर दिनेश रघुवंशी जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका हार्दिक आभार प्रकट किया जाता है। बहुमूल्य समय परिवार को दिया, निकट भविष्य में भी ये आपका भ्रात विज्ञात आपको पुनः अधिकार स्वरूप परेशान करता रहेगा।😀
9
रघुवंशी वह नाम है, जो कवि कुल सिरमौर।
कहते मुक्तक गीत जब, लगे उन्हीं का दौर।।

कविवर जय प्रकाश जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
10
कवियों  के इस गाँव में, सुना एक 'जय' नाम।
श्रोता के मन की कहें, बसें हृदय के धाम।।

कविवर कौशल शुक्ला जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
11
मन की कहते बात सब, कौशल कवि के भाव।
भावों की नदिया बहे, अलग सृजन की नाव।।

कविवर भूषण त्यागी जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
12
भूषण कहते वीर रस, राष्ट्रवाद के कार्य।
पावन इनका क्षेत्र वो, जहाँ रहे हैं आर्य।।

कवयित्री मीनाक्षी पारीक जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
13
मीनाक्षी पारीक को, सुनते श्रोता खूब।
कविता की गंगा बहे, कहें भाव में डूब।।

कविवर महेंद्र जैन जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
14
कविवर जैन महेंद्र जी, हरियाणा की शान।
सतत कर्म नित श्रेष्ठ हैं, इनकी ये पहचान।।

पुत्र ध्रुव इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
15
वर ध्रुव वीणापाणि का, उत्तम स्वर का ज्ञान।
सीख चलो कविता कथन, बने अलग पहचान।।

सरोज दुबे विधा जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
16
मधुर लुभावन स्वर सरित, बहे 'विधा' की गंग।
वर ये वीणापाणि का, कविता काव्य उमंग।।

कवयित्री शील कौशिक जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
17
हरियाणे की ये सुता, शील कहें सब नाम।
गीत गजल पहचान से, सिद्ध काव्य के काम।।

कवयित्री पूजा सुगंध जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
18
पूजा काव्य सुगंध से, सुरभित कलम सुगंध।
छंद अनेक प्रकार के, कहे अनेको बंध।।

कविवर कमल प्यासा पृथि जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
19
काव्य कमल प्यासा कहे, कविता के सब भाव।
विश्लेषण  भी  दे  रहे,  चली  भाव   की   नाव।।

कवयित्री प्रगति सिन्हा जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
20
प्रगति गीत मुक्तक कहे, कहे निराले बंध।
काव्य धार गंगा बहे, खिलती बाग सुगंध।।

कवयित्री गायत्री शुक्ला जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
21
गायत्री शुक्ला बनी, एक प्रतीक महान।
शिक्षण जैसे कार्य की, ऊँची सी है शान।।

कवयित्री गीतांजलि विधायनी जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
22
गीतांजलि इस देश का, अनुपम सा उपहार।
अमेरिका में कर रही, हिन्दी बोल प्रचार।।

गजलकारा सोना रानू जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
23
सोना रानू की ग़ज़ल, इनके उत्तम बोल।
परिचय इनका दे रहे, शेर बड़े अनमोल।।

कविवर देव कवड़कर जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
24
देव कवड़कर काव्य के, एक पुरोधा तुल्य।
देख समस्या बोलते, श्रेष्ठ कथन बाहुल्य।।

मशहूर ग़ज़लकार विजेंदर ग़ाफ़िल साहेब जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
25
ग़ाफ़िल ग़ज़ल विजेंद्र का, रहा नाम पर्याय।
कीर्तिमान सब बोलते, ढूँढे विश्व उपाय।।

मशहूर गजलकारा अल्पना सुहासिनी जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
26
सुहासिनी जी अल्पना, पढ़ें काव्य गंभीर।
सच का दर्पण दे दिखा, कविता की तासीर।।

युवा कविवर चेतन भारद्वाज जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
27
चेतन प्रतिभावान है, अनुपम ये कविराज।
काव्य धरोहर मानते, देख रहे जो आज।।

कविवर भारत भूषण वर्मा जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
28
भारत भूषण श्रेष्ठ कवि, श्रेष्ठ रखें पहचान।
पड़ी लेखनी सोच में, कैसे लिखदे शान।।

मशहूर ग़ज़लकार रवि कांत अनमोल जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
29
उत्तम कवि रवि कांत है, उत्तम इनके बोल।
चमके अम्बर चांद ज्यूँ, इन्हें कहें अनमोल।।

महशूर ग़ज़लकार रमेश पुहाल जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
30
और रमेश पुहाल को, किस्से सब कंठस्थ।
हाली की हर बात वो, जिनके रहे तटस्थ।।

हास्य कविवर सुरेंद्र यादवेंद्र जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
31
हास्य सुरेंद्र प्रभाव है, यादवेंद्र है नाम।
एक व्यक्ति दो नाम से, काव्य व्यंग्य के काम।।

हास्य कविवर बिनोद हँसोड़ा जी आपने हँसा-हँसा कर सबको लोटपोट किया इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
32
विधिवत रस सधते जहाँ, एक बिनोद प्रमाण।
और हास्य रस की नदी, फूटे बिन ही बाण।।

पुत्र कविवर लक्ष्य कौशिक इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
33
नाम लक्ष्य कौशिक प्रमुख, सुने नवांकुर गीत।
करता नाम यथार्थ ये, मिले सदा ही जीत।।

शीला गहलावत सीरत जी आपका आत्मीय आभार प्रकट करती पंक्ति सौंपते हैं आपको
34
शीला सीरत काव्य की, सरिता एक महान।
उत्तम रस धारा बहे, उत्तम इनका ज्ञान।।

पुत्र कविवर सुमित कौशिक इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
35
काव्य सुमित कौशिक करे, भाव जड़े गंभीर।
काव्य जगत में कीर्ति हो, बढ़े निरन्तर वीर।।

हरियाणा के मशहूर गीतकार विकास यश कीर्ति जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
36
छंद बद्ध यश कीर्ति के, सुने अनेकों बंध।
बढ़ती दुगनी ही रही, इनकी काव्य सुगंध।।

हरियाणा के हास्य कविवर सुंदर कटारिया जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
37
कटारिया सुंदर कहे, देख हास्य के बोल।
सुनते ही सब हँस पड़े, लाये मिश्री घोल।।

कलम की सुगंध सृजनशाला समूह की मुख्य संचालिका कवयित्री नीतू ठाकुर 'विदुषी' जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
38
कवयित्री नीतू पढ़े, आज जगत के रोग।
करे प्रहार कुरीति पर, दिखे जहाँ उद्योग।।

कवयित्री एकता भारती इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
39
आज एकता भारती, नया नहीं है नाम।
काव्य पाठ के क्षेत्र में, इनके ऊँचे दाम।।

हरियाणा के हास्य कविवर कृष्ण गोपाल विद्यार्थी जी प्रस्तुत हैं आपके आभार की पंक्तियाँ
40
कृष्ण यही गोपाल है, विद्यार्थी उपनाम।
हास्य व्यंग्य के योग से, इनके अद्भुत काम।।

कवयित्री रजनी रामदेव जी प्रस्तुत हैं आपकी 2 पंक्तियाँ
41
रामदेव रजनी कहे, उत्तम सारे बंध।
सभी जड़ाऊ बोलती, अनुपम से ये छंद।।

कलम की सुगंध छंदशाला समूह की मुख्य संचालिका कवयित्री अनिता मंदिलवार सपना जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
42
अनिता मंदिलवार जी, काव्य करे गंभीर।
भाव भरी नौका चले, लगे सरयु के तीर।।

हिन्दी ग़ज़ल के बड़े हस्ताक्षर कविवर कुँवर बेचैन जी इन 2 पंक्ति के साथ आपका आभार प्रकट किया जाता है।
43
श्रेष्ठ कुँअर बेचैन कवि, दिखते सूर्य समान।
आज मंच ये खुश हुआ, पाकर इनसे ज्ञान।।





पत्रकार आदरणीय अशोक चुघ जी

पत्रकार सुरेश निरंकारी जी

पत्रकार अरविंद जी

अशोक चुघ पत्रकार
सुरेश निरंकारी पत्रकार
अरविंद पत्रकार 
आप सभी का कलम की सुगंध परिवार की तरफ से हार्दिक आभार पत्रकार महोदय , नमन, प्रणाम आपके अतुलनीय सहयोग के लिए, भविष्य में भी परिवार आपसे इसी सहयोग भाव की अपेक्षा रखता है पुनः हार्दिक आभार।



संजय कौशिक 'विज्ञात'
(कलम की सुगंध)

Tuesday, 17 March 2020

कलम की सुगंध के अनमोल रत्न

*कलम की सुगंध*

  अर्णव कलश एसोसिएशन के राष्ट्रीय साहित्यिक मिशन कलम की सुगंध के स्वरूप पर दो शब्दों की व्याख्या गद्य -पद्य की भिन्न-भिन्न साहित्यिक विधाओं के भिन्न-भिन्न व्हाट्सएप्प ग्रुप के माध्यम से और फेसबुक के माध्यम से हजारों कलमकारों को उनकी मनपसंद विधा में सृजन, लेखन कार्य नियमानुसार सीखना और सीखाना।


*कलम की सुगंध के अनमोल रत्न*

सजंय कौशिक 'विज्ञात'  (पानीपत हरियाणा) कलम की सुगंध संस्थापक के बहुमूल्य रत्न बाबूलाल शर्मा 'विज्ञ' (दौसा राजस्थान), अनिता मंदिलवार 'सपना' (अंबिकापुर छतीसगढ़) नजर द्विवेदी (उत्तरप्रदेश) हीरालाल यादव (मुंबई महाराष्ट्र) मेहुल लूथरा (चरखी दादरी हरियाणा) संजय सनन (पानीपत हरियाणा) नरेश 'जगत' (नवागाँव, महासमुंद छत्तीसगढ़) ऋतु कुशवाह (मध्यप्रदेश) देव टिंकी होता (छत्तीसगढ़)  नीतू ठाकुर 'विदुषी' (महाड, महाराष्ट्र) अनंत पुरोहित 'अनंत' (छत्तीसगढ़) निधि सिंगला (उत्तरप्रदेश) अनुपमा अग्रवाल (उत्तरप्रदेश) अनुराधा चौहान (मुम्बई, महाराष्ट्र) अभिलाषा चौहान (राजस्थान) रुनु बरुआ (असम) नवलपाल प्रभाकर 'दिनकर' (साल्हावास, झज्जर, हरियाणा) सुशीला जोशी 'विद्योत्मा' (मुज्जफरनगर) कुसुम कोठारी (कलकत्ता पाश्चिम बंगाल) डॉ. इन्दिरा गुप्ता 'यथार्थ' (दिल्ली) अर्चना पाठक निरन्तर (अंबिकापुर छत्तीसगढ़) इंद्राणी साहू साँची (भाटापारा, छत्तीसगढ़)  बोधन राम निषादराज 'विनायक' सहसपुर लोहारा, जिला-कबीरधाम(छ.ग.) गोपाल साखी पांडा (छत्तीसगढ़) मनोरमा जैन 'विभा' (मध्यप्रदेश) चमेली कुर्रे 'सुवासिता' (बस्तर छत्तीसगढ़) सरोज दुबे 'विधा' (रायपुर छत्तीसगढ़) रूपेश कुमार (सिवान, बिहार) सहित अर्णव कलश अध्यक्ष रमेश चंद्र कौशिक गुरु जी बेरी वाले (समालखा, पानीपत, हरियाणा) और महासचिव डॉ. अनिता भारद्वाज 'अर्णव' (चरखी दादरी हरियाणा) पवन रोहिला (पानीपत हरियाणा)

*ये कुण्डलियाँ बोलती हैं*

कुण्डलियाँ साझा संग्रह रवीना प्रकाशन के माध्यम से प्रकाशित हो चुका है जिसमें पूरे भारत वर्ष के समकालीन 74 कुण्डलियाँ रचनाकारों को सम्मिलित किया गया है जिसमें कवि रचनाकारों के साथ-साथ कवयित्री रचनाकारों ने भी बढ़ चढ़ कर प्रतिभागिता दर्ज की है। इससे यह प्रमाणित होता है कि कुण्डलियाँ 6 पंक्ति 12 चरण की छंदबद्ध विधा को जितनी सरलता से कवयित्री रचनाकारों ने सृजन किया है वह बहुत ही प्रशंसनीय है। कलम की सुगंध के राष्ट्रीय साहित्यिक मिशन छंद को कलम द्वारा अधिक से अधिक लिखा जाये इन उद्देश्यों की पूर्ति में लगभग प्रतिवर्ष 100 से अधिक नवोदित रचनाकार और प्रतिष्ठित रचनाकार जो छंद मुक्त और अतुकांत लिखते आ रहे हैं उन्हें प्रशिक्षित करके छंद लिखवाए जाते हैं।

*योजनाबद्ध साझा संग्रह*

*विज्ञात नवगीत साझा संग्रह* अनेक साझा संग्रह प्रकाशित करवा चुके प्रधान सम्पादक संजय कौशिक 'विज्ञात' अर्णव कलश एसोसिएशन के राष्ट्रीय साहित्यिक मिशन कलम की सुगंध के माध्यम से नवगीत साझा संग्रह योजनाबद्ध किया गया है इस संग्रह में सह सम्पादक नीतू ठाकुर 'विदुषी' के सहयोग से सम्पूर्ण भारत वर्ष के नवगीतकारों को सम्मिलित करके इस विधा के माध्यम से सृजन में बिम्ब, सकारात्मक सोच, नवधारस और सपाट कथन के चलते लुप्त प्रतीत अलंकारों के पुनः प्रयोग कर सृजनात्मक शैली में सरलता से अपनाया जा सके ऐसी योजना है।

*प्रकाशनाधीन साझा संग्रह*

भारत वर्ष के समकालीन सर्वोत्तम दोहाकारों के साथ *ये दोहे बोलते हैं* दोहा साझा संग्रह फरवरी 29 को सम्पूर्ण किया गया था। जिसमें सम्पूर्ण भारत वर्ष 153 समकालीन दोहाकारों को सम्मिलित किया गया था। उत्कर्ष प्रकाशन ने कलम की सुगंध राष्ट्रीय साहित्यिक मिशन के सहयोग से प्रधान सम्पादक संजय कौशिक 'विज्ञात' सह सम्पादक अनिता मंदिलवार 'सपना' और सम्पादक की भूमिका में डॉ. अनीता रानी भारद्वाज 'अर्णव' हैं।

*हाइकु संग्रह* :- देश के अलग-अलग प्रान्तों से 17 नियमों पर  101 हाइकुकारों को सम्मिलित कर साझा संग्रह प्रकाशनाधीन है जिसमें गत 3 वर्षों से सह सम्पादक नरेश 'जगत' के अथक परिश्रम से 10-10 हाइकु चयन हो सके।यह अपने आप में 3 साल की लंबी अवधि में तैयार होने वाला विशेष और अद्भुद संग्रह है।

*कवि सम्मेलन* : धरातल पर वार्षिक आयोजन 4 कवि सम्मेलन और मुशायरे से अलग ऑनलाइन कवि सम्मेलन , छंद काव्य पाठ सम्मेलन, मुशायरे समय समय पर आयोजित होते रहते हैं।

*ई-पत्रिका* मासिक / त्रय मासिक ई पत्रिका भी उपलब्ध करवाई जाती है जिसमें ग़ज़ल, छंद नवगीत, लघु कथा आदि सम्मिलित किये जाते हैं।

*शतकवीर सृजन कार्यक्रम* इस कार्यक्रम में किसी एक विधा पर प्रदत्त शब्द के माध्यम से एक- एक विधा को 100-100 बार लिखवाया जाता है। इसके पश्चात सृजनकर्त्ता को शतकवीर सम्मान से सम्मानित किया जाता है। दोहा, रोला, चौपाई, मुक्तक, मनहरण जैसी विधाओं के पश्चात अब हाल ही में कुण्डलियाँ शतकवीर कार्यक्रम सफलता पूर्वक सम्पन्न हो चुका है।

*एकल संग्रह की योजना* गत चार वर्षों में इस वर्ष पहली बार एकल संग्रह भी निकालने की योजना बनाई गई है। जिसकी शुरूवात कुण्डलियाँ एकल संग्रह लघु पुस्तिका के रूप में प्रारम्भ की जा चुकी है।

*वर्कशाप* के माध्यम से विधा , छंद अलंकार और अन्य बारीकियों पर समय-समय पर सामूहिक चर्चाएं आयोजित होती रहती हैं। जिनसे शिल्प की बारीकियां आसानी से समझी जा सकती हैं।


*ये कुण्डलियाँ बोलती हैं*  *(साझा संग्रह)*
*प्रधान सम्पादक*
*संजय कौशिक 'विज्ञात'*
9991505193

Sunday, 8 March 2020

प्रसिद्धि...दिव्या राकेश शर्मा


प्रसिद्धि
_______
"ये कहानी है?".... नव्या की लिखी रचना को प्रकाशक फेंकते हुए बोला।
"ना कोई रस ना आकर्षण।"

"मै समझी नहीं सर ...कैसा आकर्षण?"
"एक सच्चे प्रेम पर कुछ लिखने की कोशिश की है और एक लेखक हैं उनको भी दिखाई थी।"

"प्लीज़ सर अपने अखबार में जगह दीजिए ना एक बार।"नव्या ने कहा।

"बकवास......तुम क्या प्रेम के बीच प्रकृति को लाई हो और नायिका का चित्रण!!
कम से कम नायिका के सौंदर्य का चित्रण तो ठीक करती।"
"ये क्या लिखा है ...आँखें चितचोर
होंठ अंगारे ....जुल्फें रेशमी।
ये क्या चित्रण हुआ।"

"शरीर के उन अंगों का चित्रण छोड दिया जिससे पुरूष उत्तेजित हो ...
प्रेमालाप करते दिखा रही हो और फूल और चाँद का साहारा ले रही हो ...।कम से कम उनके प्रेम की व्याख्या तो करती...काम को प्रदर्शित करना जरुरी है..।"
"लोलुपता दिखाने के लिए कम से कम नायक के मन में कामवृत्ति तो दिखाती ....मिलन दिखा रही हो और उपमा का सहारा ले रही हो ,संसर्ग तो ठीक से दिखाती..तुम्हारी रचना को पाठक नहीं मिलेंगे ,क्योंकि तुम विचारों को विस्तृत नहीं कर पा रही हो ....ऐसी रचना छाप कर हमें अपना नाम खराब नहीं करना ।"
शांति से सुनती नव्या फट पडी....
"तो सर प्रेम की भावनाओं को दिखाने के लिए मैं अश्लीलता भरे शब्दों का सहारा लूं ?"
"माफ कीजिएगा सर ..जब कोई आपसे पूछता है, कि आप किसकी संतान है ,तो आप ये नहीं कहते कि मैं मेरे पिता द्वारा माता के गर्भ में रोपित बीज हूँ.....आप सिर्फ नाम बताते हैं , आप स्थान बताते है ये नहीं बताते कि बच्चे दो टाँगों के बीच से पैदा हुआ ,आप ये नहीं बताते की माता के किस अंग से पैदा हुए ।"

" फिर मै कैसे व्याख्या करूं कि वो प्रेम कैसे कर रहे है ?...कथा लिखी है ,विधि नहीं!और ना मिले पाठक और ना मिले प्रसिद्धि।इसके लिए मैं स्त्री के अंगों का मसाले दार वर्णन नहीं कर सकती।"

"बहुत देखी है तुम जैसी!इस बदतमीजी के बदले मै तुम्हारा कैरियर खराब करवा सकता हूँ।"

"डर किसे है?मैं तो साधारण हूँ। प्रसिद्धि तो आपके पास है।"

दिव्या राकेश शर्मा

३०-९-१७

Tuesday, 3 March 2020

शर्म कहाँ ..दिव्या राकेश शर्मा

शर्म कहाँ ..

उसके तन से खून रिस रहा था।कपड़े तार तार हो गए थे।वह लड़खड़ाते कदमों से उसके निकट आ पैरों पर गिर पड़ी।
"मेरी रक्षा करों।"
   "कौन हो तुम?"वह चौक कर बोला।

"आह!"बस एक कराहट निकली।
"मुझे अपना परिचय दो।"वह पुनः बोला।
"मैं...मैं..मानवता हूँ।मुझे बचाइए वरना.. वरना.. मुझे मार डालेंगे।"मार्मिकता से वह बोली।
"कौन मार देगा!इस प्रकार घायल अवस्था में कैसे?"
"यह समाज।जिससें रिसता मवाद मुझे लील रहा है।मेरे शरीर में असंख्य घाव हुए हैं।चोटिल हूँ मैं और डरती हूँ जीवित न रहूंगी।"विलाप कर वह बोली।
"कैसे हुए यह घाव?"वह आश्चर्य से बोला।
"आह्!"वह पुनः करहाइ.."जब भी किसी स्त्री, किसी अबोध कन्या पर दरिंदगी होती है चोटिल तो मैं ही होती हूँ।"
"जब भी किसी भ्रूण को इसलिए कुचल दिया जाता है क्योंकि वह स्त्री है तो रोती तो मैं हूँ।मुझे बचा लीजिए आप ,बचा लीजिए।"वह बिलखने लगी।
"परंतु मैं तुम्हारी रक्षा नहीं कर सकता।"दुखी हो वह बोला।
"परंतु आप तो धर्म है आप मेरी रक्षा क्यों नहीं कर सकते?"रोष से वह बोली।
"हाँ मैं धर्म हूँ पर बंदी बना दिया गया हूँ।इस सड़े समाज में मैं बंधक हूँ।"वह लाचारगी से बोला।
तभी एक मवाद की लहर उन दोनों के निकट दिखने लगी और उस लहर में बह रही थी एक स्त्री।
समाज वहीं खड़ा अट्टहास कर रहा था।

दिव्या राकेश शर्मा।

Sunday, 1 March 2020

गीत और नवगीत में छंदों का बढ़ता महत्व - कुसुम कोठारी जी ,कोलकाता

गीत और नवगीत में छंदों का बढ़ता महत्व


सबसे पहले हमें यह जानना है कि हिन्दी काव्य में छंद का महत्व क्या है।

लय न हो तो काव्य में सरसता का भान कम हो जाता है ।
लय लाने के लिए कविता या गीत में वर्णों की संख्या और स्थान से सम्बंधित नियमों का निर्धारण किया जाता है, जो छंद के द्वारा होता है।
काव्य सृजक सब जानते हैं कि
छंद लेखन कोई नई  विधा नहीं है यह वेदिक युग से चली आ रही है ।

हिंदी  गीतों  में छंद का महत्व गीत को संगीत के साथ जोड़ता है।
संगीत हिंदी में भाव व्यक्त करने का सबसे सहज माध्यम है ।
गीत छंदों से जुड़कर सरस संगीतात्मक और मनोहर हो जाते  है, इनमें रंजकता बढ़ती है।
कोई भी साधारण उक्ति विशेष लय ,मात्रा और वर्ण योजना में  बंधकर निखरती है ,तो वो भाव रस व्यक्त करने में और भी सक्षम हो जाती है।
गीत एक ऐसी विधा है जिसमें भावों की कोमलता प्रधान रहती है, इसलिए सदा भावों के लालित्य और मर्म  को स्पष्ट प्रवाहता और गति देना ही प्रधान अभिष्ट रहता है।

काव्य में गीत संप्रेषण का मुख्य घटक है ,ये श्रोता और पाठक दोनों को बांधने में सक्षम है, ऐसे मुख्य स्रोत को संबल सक्षम और जनप्रिय  बनाने में छंदों का महत्व पूर्ण योगदान है ।
इसलिए आजकल रचनाकारों का रुझान छंदों की तरफ बढ़ता परिलक्षित हो रहा है ।
गीत और नव गीत भी छंद में बंधकर नये बिंब नये प्रतीकों के साथ अपना अलग और उच्च स्थान बना रहे हैं ।

गीतों में छंद का प्रचलन अब साफ साफ दिखने लगा है आम रचनाकार भी छंदों से प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाता कारण साफ है।

छंदों से सौंदर्यबोध होता है,जो पाठक और श्रोता को आपस में जोड़ता है।

छंद मानवीय भावनाओं को
आडोलित करते हैं जिससे गीतों में निहित संदेश सुनने वालों तक सहज पहुंच ये है।

छंदों में स्थायित्व होता है,जिससे रचनाकार के सृजन को स्थायित्व मिलता है ।

छंद सरस होने के कारण मन को भाते हैं और बार-बार गुनगुनाने को लालायित करते हैं।
छंद  निश्चित लय पर आधारित होते  हैं इसलिए  सुगमतापूर्वक कण्ठस्थ हो जाते हैं।
आज भारतीय चित्रपट संगीत जन-जन के मुंह चढ़ा है ,
आश्चर्यजनक तथ्य ये है कि कुछ गाने मील का पत्थर बन गये कुछ बस थोड़े दिन में लोगों के दिल से उतर जाते हैं ।
अब देखते हैं थोड़ा गहराई से कि ज्यादा प्रसिद्ध गीतों ( गाने ) का आधार कोई ना कोई सनातनी छंद अवश्य है ।
छंदों पर आधारित होने के कारण ये सहज कंठस्थ हो जाते हैं और इनकी प्रवाहित लय के कारण ये सरलता से मन में स्थापित होजाते हैं ।
यही बहुत से कारण हैं जो गीत और नवगीत के रचनाकार छंद आधारित गीत लिखने लगे जिससे गीतों में छंदों का प्रचलन पिछले सालों में बहुतायत से बढ़ा है , जो साहित्य के लिए एक सकारात्मक परिणाम होगा ।

गीतों में छंद का प्रचलन अब साफ साफ दिखने लगा है आम रचनाकार भी छंदों से प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाता कारण साफ है।

छंदों से सौंदर्यबोध होता है,जो पाठक और श्रोता को आपस में जोड़ता है।

छंद मानवीय भावनाओं को
आडोलित करते हैं जिससे गीतों में निहित संदेश सुनने वालों तक सहज पहुंच ये है।

छंदों में स्थायित्व होता है,जिससे रचनाकार के सृजन को स्थायित्व मिलता है ।

छंद सरस होने के कारण मन को भाते हैं और बार-बार गुनगुनाने को लालायित करते हैं।
छंद  निश्चित लय पर आधारित होते  हैं इसलिए  सुगमतापूर्वक कण्ठस्थ हो जाते हैं।
आज भारतीय चित्रपट संगीत जन-जन के मुंह चढ़ा है ,
आश्चर्यजनक तथ्य ये है कि कुछ गाने मील का पत्थर बन गये कुछ बस थोड़े दिन में लोगों के दिल से उतर जाते हैं
अब देखते हैं थोड़ा गहराई से कि ज्यादा प्रसिद्ध गीतों( गाने)का आधार कोई ना कोई सनातनी छंद अवश्य है ।
छंदों पर आधारित होने के कारण ये सहज कंठस्थ हो जाते हैं और इनकी प्रवाहित लय के कारण ये सरलता से मन में स्थापित होजाते हैं ।
यही बहुत से कारण हैं जो गीत और नवगीत के रचनाकार छंद आधारित गीत लिखने लगे जिससे गीतों में छंदों का प्रचलन पिछले सालों में बहुतायत से बढ़ा है ,जो साहित्य के लिए एक सकारात्मक परिणाम होगा ।

-कुसुम कोठारी ,कोलकाता