Thursday, 15 April 2021

उल्लाला छंद शिल्प विधान परिभाषा एवं उदाहरण


उल्लाला छंद / चंद्रमणि छंद / कर्पूर छंद / उल्लाल छंद ( मात्रा 15/13) भेद -2 
संजय कौशिक 'विज्ञात'--

उल्लाला छंद / चंद्रमणि छंद/ कर्पूर छंद - उल्लाला छंद के प्रायः दो भेद होते हैं 2 पंक्ति 4 चरणों में दोहे की तरह दूह कर लिखा जाने वाला यह छंद अपने आकर्षण के चलते सर्वत्र विख्यात है। कुछ जानकार इसे उल्लाल नाम से भी जानते हैं। इस छंद का प्रथम भेद

दोहे के विषम चरण की 13 मात्राओं के मात्रा भार और शिल्प का अनुकरण करते हुए इसी एक चरण के शिल्प को लगातार 4 चरणों में लिखने से उल्लाला छंद का प्रथम भेद निर्मित होता है जो कवियों द्वारा लेखन में अत्याधिक प्रचलित रहा है।


इसी प्रकार इसका द्वितीय भेद प्रचलन में कम रहा है तदापि इसकी उत्तम लय आकर्षण का केंद्र रही है इसका शिल्प भी दोहे के विषम चरण की 13 मात्राओं के शिल्प में 2 मात्राएं और जोड़ देने के पश्चात विषम चरण 15 मात्राओं का तथा सम चरण दोहे के विषम चरण 13 मात्राओं में दोहे के विषम चरण के शिल्प का अनुकरण करना होता है। इस प्रकार से उल्लाला के द्वितीय भेद के शिल्प में  4 चरणों का मात्रा भार  15-13 और 15-13 रहता है।


उल्लाला छंद का द्वितीय भेद जिसका मात्रा भार 15,13 और 15,13 रहता इस छंद के शिल्प में विशेष ध्यान में रखने वाली बात ये है कि इसके प्रारम्भ में चौकल अनिवार्य है परन्तु जगण वर्जित है। इस छंद की लय गाल-लगा के प्रयोग सी गुथी हुई होती है। अपनी उत्तम लय के कारण इसकी गेयता का आनंद चरम पर होता है। श्रोता भी इसकी उत्तम लय के विशेष आकर्षण के चलते आनंद प्राप्त कर झूम उठते हैं। तुकबंदी सम चरण द्वितीय और चतुर्थ चरण की मिलाई जाती है। आइये उदाहरण के माध्यम से समझते हैं । 


चौकल से प्रारम्भ 

(4 मात्रा का शब्द समूह) 

इसी चरण की अंतिम 5 मात्रा 212 👈  अर्थात गुरु लघु गुरु ऐसे ही लिखनी हैं

15 मात्रा में से 4  मात्रा प्रथम की और 5 मात्रा अंत की निर्धारित है कुल मात्रा 9 हो गई 

अब इन 9 मात्रा के मध्य बची 6 मात्रा इनमें यदि 3+3 के जोड़े गाल+लगा अर्थात 21+12 अर्थात गुरुलघु और गुरु लघु लिखेंगे तो भाव अवश्य बिखर जाएंगे । कई बार शिल्प में वो सब कथन छूट जाता जो हम अतुकांत में कह देते हैं 

ऐसे में बची हुई इन मात्राओं को भी चौकल और द्विकल के अर्थात 4+2 या 2+4 के माध्यम से सरलता से कह सकते हैं। 


ये एक चरण हुआ। 

सभी चरणों की अंत की 5 मात्रा पहले ही निर्धारित है 212 अर्थात गुरु लघु गुरु ( इसमें गुरु को 2 लघु के माध्यम से लिख सकते हैं जबकि लघु को लघु लिखना अनिवार्य है।


उल्लाला छन्द का एक और नाम 'चंद्रमणि' भी कहा जाता है। प्रस्तुत पदों को ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे कि प्रत्येक विषम चरण के प्रारम्भ में एक 'गुरु' या दो 'लघु' को ध्यान से उच्चारण करेंगे तो, इसके बाद का शाब्दिक विन्यास दोहे की तेरह मात्राओं की तरह ही रहता है। उसी अनुरूप पाठ का प्रवाह भी रहता है। इस कारण विषम चरण में पहले दो मात्राओं के बाद स्वयं एक यति सी बन जाती है जिसके बाद आगे का चरण दोहा के विषम चरण की तरह ही लय में बंधता चला जाता है।


साधारण शब्दों में शिल्प को ऐसे समझें 

चौकल चौकल चौकल लगा, चौकल चौकल द्विकल लगा  ..... तृतीय और चतुर्थ चरण भी क्रमश 1 और 2 की तरह ही रहेंगे।


भावपक्ष भाषाशैली सार्थक एवं स्पष्ट होनी चाहिए तथा प्रत्येक चरण सार्थक व स्वतंत्र भी हो   और चारो चरण आपस में एक दूसरे से घनिष्ठ संबंध निभाते हुए होने चाहिए। इस छंद में सम चरणान्त और सम तुकांत अनिवार्य है।


मुखिया अपने घर ग्राम के, होते लाखों लोग हैं।

पर बनते कुछ ही मुख्य हैं, हिय बसते संयोग हैं।।


कविता कवियों की कल्पना, कल्पित कोरे भाव हैं।

सागर अम्बर में नित उड़ें, बादल में भी नाव हैं।।


जननी माता तो जन्म दे, पाले धरणी माँ सदा।

दोनों में हो आस्था जहाँ, ईश्वर वर दे सर्वदा।।


जननी माता सबसे बड़ी, धरणी सा व्यवहार है।

दोनों माता को कर नमन, इनसे ही संसार है।।


काँसा भिक्षा ले जब चला, चमके काँसा रूप है।

काँसा बीहड़ में ही खिला, सहकर जलती धूप है।।


गहरी सी अपनी पीर है, कहते अपने घाव ये।

अपनो से ही आहत हुए, अपनो के ही दाव ये।।


भाषा उत्तम है मौन की, लाखों हल रखती सदा।

सम्भव हो तो सब बोलिये, ये सुर गूँजे सर्वदा।।


यमुना के तट पर चातकी, देखे शशि की ओर है।

लहरें कोयल सी गा रही, रागों जैसा शोर है।।


पनघट उजड़े से दिख रहे, व्याकुल पक्षी शोर से।

क्रंदन पूछे फिर मौन की, प्यासी सी इस भोर से।।


मधुबन की हरियाली महक, जो देती फल फूल है।

चलती है फिर आरी सदा, ये मानव की भूल है।।


संजय कौशिक 'विज्ञात'

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बाबू लाल शर्मा,बौहरा,विज्ञ


माता शुभदा हे शारदे, दे मति लिख दूँ छंद पद।

पढ़ सामाजिक सद्भाव हो, हर जन मन के द्वंद मद।।


प्रभु में आस्था घर नींव मित, गहरी रखिए सीख मन।

शिक्षा पोषणमय स्वच्छता, उत्तम जीवन लीख जन।।


हिन्दी भाषा को सीखिये, भारत का अभिमान हो।

मानव मानस जन एकता, ऐसा जन अभियान हो।।


नित मंगल ग्रह पर खोजते, जन जीवन की आस हो।

जीवन में मंगल जब रहे, जल धरती शशि भास हो।।


तन वस्त्रों की बहि गन्दगी, जल साबुन से दूर कर।

मानस आत्मा निर्मल रहे, सत्संगति भरपूर कर।।


सूरज सम मुखिया हो सदा, दल हो या सरकार घर।

जन मत को दे अवसर भले, पोषण हित आधार पर।।


गुड़िया से खेले जब सुता, तब नित गुड़िया पर्व सम।

जिस घर जन्मे शिशु बालिका, कर ले उन पर गर्व हम।।


रचना देखो इस देह की, तरु जग घर ब्रह्माण्ड भू।

रग रग तन में विज्ञान है, कण कण से मृद भाण्ड भू।।


जननी हर शिशु को जन्म दे, पालन करती मात नित।

विधना जैसा होता पिता, नर मत कर आघात चित।।


नव रचना कर सविता बने, दिनकर बन दिन मान जन।

मानव मानस तन तेज भर, दीपक सम दिवसान बन।।


बाबू लाल शर्मा,बौहरा,विज्ञ

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नीतू ठाकुर विदुषी


धारा यमुना की ये सदा, लेती कान्हा नाम है।

पावन लहरें गाती रहें, बनते तट पर धाम है।।


रोचक बातों के ही लिए ,देते सच को मार सब।

बातें झूठी बिकती रही, खटकी है ये बात कब।।


अंबर धरती से ये कहे, इस रिश्ते में आस है।

मेघों का मैं राजा बना, तेरी भी ये प्यास है।।


रेखा हाथों की जो पढ़े, कहते हैं विद्वान सब।

मंथन कर्मों का जब करें, निकले उसमें पुण्य तब।।


तीरथ बनते हैं बस वहीं, बसते जिस स्थल ईश हैं।

मिट्टी भी चंदन सी बने, झुकते मानव शीश हैं।।


मुखिया सारे अब हो गए, घरका बंटाधार कर।

अंतिम क्षण साधू से बने, जीवन चौसर हार कर।।


गुड़िया गुड्डे के खेल में, आधा जीवन खो गया।

कठपुतली बन नाचे सभी, अंतिम क्षण भी रो गया।।


रचना सारे हैं ईश की, सबके अपने ध्यास है।

जीवन की गाड़ी है खड़ी, खींचे जिसको श्वास है।।


जननी नित अपने नेह से, गढ़ती है संसार को।

ममता की छाया दे घनी, सिखलाती व्यवहार को।


सविता की भविता कहे, उज्वल अग्रिम काल हैं।

खुशियों की नव वर्षा भरे, आने वाले साल हैं।।


नीतू ठाकुर 'विदुषी'

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अनिता सुधीर आख्या


अंजनि सुत मारुति वीर हैं, संकट मोचक आप हैं।

भक्तों के संकट दूर कर,हरते जग के ताप हैं।।


बर्तन जब कांसा धातु के,रखते घर में लोग थे।

कठिनाई में धन संपदा, बनते उत्तम योग थे।।


पनघट पर घट लेकर खड़ी,मृगतृष्णा की प्यास में।

जीवन घट भर दो श्याम अब,संझा बेला पास में।।


माता के आँचल में रहे, संतति का उत्कर्ष है।

बूढ़ी ममता की झुर्रियां,जीवन का संघर्ष है।।

 

उर मधुबन वृंदावन हुआ, धड़कन ढूँढ़े श्याम को।

प्रभु सिमरन करती रात दिन,पावन कर दो धाम को।।


दिनकर तनया के तीर पर,मोहन लीला कर रहे।

उस पावन यमुना नीर से,उर की गागर भर रहे।।


जन जन करते आलोचना,रोचक संगत कब कहें।

ज्ञानी बनते सबसे बड़े,दूजे की वो कब सहें।।

 

समझें सतरंगी अर्थ को,कितने सुंदर तथ्य हैं।

धरती अंबर जल सूर्य के,रहते अनगिन कथ्य हैं।।


रेखा जब खींची थी बड़ी, दूजे की फिर न्यून की।

झगड़े झंझट में क्यों पड़े,हो रोटी दो जून की।।


गंगा हो या गोदावरी,तीरथ मन के धाम हो।

विपदा से हाहाकार है,घर में पूजन राम हो।।

अनिता सुधीर आख्या

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इन्द्राणी साहू"साँची"


कान्हा करिए करुणा कृपा , चाकर मुझको मानिए ।

विनती विह्वल मन से करूँ , पातक पापी जानिए ।।


गाती गुनगुन गागर लिए , भरती निर्मल नीर है ।

पानी प्यासे पथिकों पिला , हरती सबके पीर है ।।


जननी जगती जग जाह्नवी , जल जन जीवन श्रेष्ठ है ।

गुरुतर गाथा गरिमा लिए , वर्णों में यह ज्येष्ठ है ।।


प्रहसित पुलकित शुभ पुष्प-सम , बचपन अति अनमोल है ।

कर ले वश में संसार को , मुख में मधुरिम बोल है ।।


पाषाणों को भी चीरकर , झरना नित अविरल बहे ।

चलना ही जीवन रीति है , यह शुभ संदेशा कहे ।।


वाणी में हो माधुर्यता , जीते जो संसार को ।

वक्ता श्रोता आह्लाद हो , समझें जीवन सार को ।।


पानी पय जल जीवन उदक , कितना निर्मल नाम है ।

संजीवन सम पावन सुधा , जीवन देना काम है ।।


माया नटिनी नर्तन करे , अज्ञानी जन रीझते ।

फँसकर फिर मोहक जाल में , पीड़ा पाकर खीझते ।।


ज्वाला जैसी जलती रही , अंतर्मन की भावना ।

दुष्टों की कलुषित सोच का , नारी करती सामना ।।


राधा मोहन की छवि निरख , पनपे पावन प्रीति मन ।

सुंदर सुरभित मन भाव ले , अपनाता शुचि रीति मन ।।


इन्द्राणी साहू"साँची"

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अनिता मंदिलवार सपना 


जीवन की परिभाषा यही, साथी बन कर संग हैं ।

बोली है हिय में गूँजती, जीवन के ही अंग है।।


बहती सब नदियाँ ही रहे, कितने जल के काज हैं।

सूखी धरती पर तो कहाँ, संभव जीवन आज है।।


पैरों में ये पायल बजे, वेणी शोभा केश में।

भींगे तन मन है शीत से, गोरी पीले वेश में।।


कंजल आँसू से घिर गई, लहरे सावन केश है।

गुंथित वेणी है घूमती, देखो पावन वेश है ।।


काजल ये नैनों में बसी, बिंदी सजती माथ है।

गजरा भी बालों में सजे, प्रीतम का जब साथ है।।


 अनिता मंदिलवार "सपना"

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कृष्णमोहन निगम सीतापुर


मुखिया हो चाहे गाँव का, कुनबे का या देश का।

पालन करना ही चाहिए, तुलसी के संदेश का।।


गुड़िया गुड़ियों से खेलती, आँगन भरती रंग थी।

निज पिय घर जाने  को खड़ी, कल तक सखियों संग थी।।


सूरज शशि बहु उड़ुगण अवनि,  कानन गिरि सरि मेघ नभ।

 खग मृग मोहक रचना सुभग, निशि वासर शुभ साँझ प्रभ।।


आदर निज जननी सा करे, पर तिय का जो भी सुजन।

निश्चय सब विधि कल्याण हो,.आये सुख उसके भवन।।


चेतन जड़ सब सविता बिना,रह ना सकें अस्तित्व में ।

कितनी अनुकम्पा है भरी, प्रभु के इसी कृतित्व में।।


कृष्णमोहन निगम सीतापुर

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कुसुम कोठारी 'प्रज्ञा'


मारुति नंदन हे नाथ सुन, विनती  मेरी आज तो।

जगती से दुर्गत तुम हरो, सारो सारे काज तो।


काँसा अग्रज छाया चले,काँसा रोता रिक्त भी।

काँसा छुपता अब फिर रहा, काँसा करता तिक्त भी।

(1काँसा=कनिष्ठ 2,भिखारी का पात्र 3,काँसा धातु ।)


पनघट पर घट घूमा बहुत, जल *भर* डूबा ताल सौ।

पय ठंडा ही देता रहा, नमता चढ़ता भाल सौ।।


आँचल लहरा जब साँझ का, सिन्दूरी हो नभ खिला।

सूरज डूबा जा नींद में, यामा का पल्ला मिला।।


मधुबन महकी मधु मालती, गुंजन गाते गान *है* ।

गमकी गेंदा गुलदाउदी, तरुवर छेड़े तान *है* ।।


 घर के मुखिया रखते सदा, संयम का आचार है।

संकट की जब आती घड़ी,धीरज रखते धार है।।


अवसर बीता बचपन गया, गुड़िया से था खेलना।

भूला फूलों की क्यारियाँ, अब कांटों को झेलना।


मोहक नूतन रचना रचे, गुरुवर बांटे ज्ञान भी।

लेखन नवरस गागर भरा, उत्तमता की खान भी।।


जननी से ऊंचा पद नही, देखा घूमा सब जगत।

माँ के सम्मुख हरि राम भी, करते है मस्तिष्क नत।।


सविता ऊर्जा देता सदा, सविता औषध खान भी।

सविता ही गिरिजा नाथ है, धाता देते मान भी।

१सविता=सूरज,२ मदार, ३शिव

धाता = विष्णु


कुसुम कोठारी 'प्रज्ञा'

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इन्दु साहू, रायगढ़ (छत्तीसगढ़)


घर के मुखिया मेरे पिता, रखते सबका ध्यान है।

सबको देते शिक्षा सदा, भरते हममें ज्ञान है।।


प्यारी गुड़िया रानी सदा, रहती मेरे संग है।

सारी बातें मेरी सुनें, जीवन का ये अंग है।।


करती माँ से मैं प्रार्थना, हर रचना में सार दो।

नित नूतन ही सीखूँ सदा, शब्दों का भंडार दो।।।


जननी जैसी कोई नहीं, ममता का आधार है।

माता के चरणों में सदा, नतमस्तक संसार है।।


सविता सी बनने की सदा, मन में रखना चाह तुम।

दृढ़ संकल्पों से ही यहाँ, पा जाओगे राह तुम।।


-इन्दु साहू,

रायगढ़ (छत्तीसगढ़)

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राधा तिवारी "राधेगोपाल"


हरती जो दुख सबके सदा, वह तो शुभदा मात हैं।

जो भी यूंँ पूजा कर रहे, खिलता उनका गात हैं।।


गहरी तो है सागर नदी, गहरा ही है प्यार अब।

सच्चाई से जो बोलता, है उसका संसार कब।।


भाषा तो सबकी ही हुई, जीने का अरमान है।

लेकिन भाषा तो हिंद की, हम सबका अभिमान है।।


मंगल से तो मंगल हुआ, सुनलो मेरी बात को।

दर्शन से अब हनुमान के,मिलता सुख दिन रात को।।


साबुन जैसे ही मीत को ,रखना अपने पास ही।

धोता है जो मन को सदा, बन कर रहता खास ही।।


राधा तिवारी "राधेगोपाल"

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पुष्पा विकास गुप्ता प्रांजलि कटनी मध्यप्रदेश


पकते जब मिलकर अन्न दो, पड़ता खिचड़ी नाम है। 

हल्का भोजन जब चाहिए, आती यह तो काम है।। 


मारुति नंदन विनती सुनो, हर लो जग की पीर सब। 

संकट मोचन तव नाम है, कहते हनुमत वीर सब।।


काँसा वह उत्तम धातु है, पूजन भोजन योग्य है। 

करते इसका उपयोग जो, देती यह आरोग्य है।। 


आँचल को लहराती हुई, शीतल पुरवाई चली। 

उपवन को देती ताजगी, सुरभित है हर कली।। 


हर उपवन मधुवन हो गया, आया जो मधुमास है। 

हैं मोहित, मन, मधुकर, मुकुल, अंतर अति उल्लास है।। 


पुष्पा विकास गुप्ता प्रांजलि कटनी मध्यप्रदेश

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अजय पटनायक


मारुति नंदन हनुमान प्रभु,विनती सुनलो नाथ जी।

वन्दन करता मैं सदा,रहना मेरे साथ जी।।


काँसा पीतल बर्तन हटे,पॉलीथिन का राज है।

दूषित खाना भगवन चढ़े,कलयुग आया आज है।।


पनघट पानी भरते सभी,करते चुगली रोज है।

नारी बातूनी है सुनो,क्या- क्या करती खोज है।।


उड़ता आँचल को देख शिशु,घूमे चारो ओर है।

करता मस्ती अटखेलियाँ,किलकारी का शोर है।।


मधुबन में झूमे मोरनी,भँवरा गाते गीत है।

फैले सौरभ मकरन्द है,लगते सबको मीत है।।


शुभदा होता जग में वही,संतति जिसके साथ है।

खुशियाँ चूमे उसके चरण,सारी दुनियाँ हाथ मे।।


गहरी तेरी दोस्ती सही,सबसे सुंदर यार है।

तुझसे ही मेरी दुनिया,मेरा तू संसार है।।


अपनी भाषा ही बोलिये,समझो उसके मोल को।

अंतर मन को लगते भले,बोलो मीठे बोल को।।


मंगलमय हो शुभ कामना,आया शुभ दिन आज है।

जीवन है खुशियों से भरा,सारे जग में राज है।।


धोकर साबुन से हाथ को,छूना भोजन थाल को।

कोरोना खतरा है बना,समझो इसके जाल को।।


अजय पटनायक

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चमेली कुर्रे 'सुवासिता' जगदलपुर बस्तर (छत्तीसगढ़)


निर्मल मन में ही सदा, ईश्वर करते वास है। 

खुशियाँ जीवन में मिले, बढ़ जाता विश्वास है।।


करुणा लज्जा ही बनी, नारी की पहचान है। 

दुष्टों के मन का भय यही, देते वे सम्मान है।।


मत उड़ना मनु आकाश में, पैसे के पर से कभी।

पर को पल में पल काट दे, गिरता जन नभ से तभी।।


भ्रम की बीमारी हो गयी, घर-घर जन बीमार है।

निज असि से नित मन चीरकर, ढूँढें क्यों उपचार है।।


सच्चाई की हर राह पर, बेटी चलना रोज तू। 

जीवन नैया डोले नहीं, शिक्षा से गुण खोज तू।। 


चमेली कुर्रे 'सुवासिता' जगदलपुर बस्तर (छत्तीसगढ़)

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सरोज दुबे 'विधा' रायपुर छत्तीसगढ़


संकट हरना सारी प्रभो, रखना मेरी लाज तुम।

वंदन करती कर जोड़ कर, पूरा करना काज तुम।।


शुभदा देवी माँ शारदा, विद्या का भंडार दो।

सद गुण सन्मति हिय में भरो, ऐसा माँ आचार दो।।


कटु बोली गहरी चोट दे, हिय को दे फिर चीर वो।

सीने से फिर सिलता नहीं, देती है बस पीर वो।।


अपनी भाषा हिंदी सरल, लगती है आसान ये।

करते हैं इसका मान हम, भारत की है शान ये।।


कड़वी बोली मत बोलिए, मन होता आघात फिर।

मीठी बोली ही बोलिए, चाहे कम हो बात फिर।।


सरोज दुबे 'विधा' रायपुर छत्तीसगढ़

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शरद अग्रवाल 'नव्या'


खुशियां मिलती आंचल तले, ईश्वर का उपहार  माँ।

खुशियों की वह खान है, ममता का भंडार माँ।।


वृन्दावन लीला श्याम की, राधा की पायल बजे।

मुरली मधुबन में बज रही, गोपी यमुना तट सजे।।


पनघट तो प्यासा ही रहे, पनिहारी मन पीर है।

देखे प्यासे उसके नयन, गागर नैना नीर है।।


बड़के का सिर पर हाथ हो, कांसा फूलों सा खिले।

भाईचारा ममता बढे, जीवन समरसता मिले।।


मारुति नंदन हनुमान जी, बलशाली विद्वान हैं।

संकट काटें पीड़ा मिटे, देवों में बलवान हैं।।


--- शरद अग्रवाल 'नव्या'

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डॉ ओमकार साहू "मृदुल"


यमुना तक्षक दूषित करे, जनमानस विष व्याप्त है।

नटवर नाथे अहि कालिया, जो श्रापित अभिशाप्त है।।


रामायण की रोचक कथा, मन वांछित सुखधाम है।

माता भ्राता, भार्या सखा, मर्यादित श्रीराम है।।


नभचर दल अंबर में उड़े, पंखों को आकार दे।

आशान्वित है नित खोज में, स्वप्नों को विस्तार दे।।


लक्ष्मणजी रेखा खींचते, निकले भ्राता खोज में।

रावण बनकर बहुरूपिया, भिक्षा माँगे भोज में।।


माता पितृ चरणों में लगे, चारों तीरथ धाम है।

उत्त्तम सेवा पग पूजना, ज्यों दशरथ के राम है।।


डॉ ओमकार साहू "मृदुल"

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अर्चना पाठक'निरंतर'


 शुभदा विद्या का दान दो, भर दो झोली ज्ञान से।

 मन में खुशियाँ बढ़ती रहें, नित दिन इसका भान दो।।


गहरी लग जाये चोट तो, तन भर लेता है इसे ।

जब मन की नैया डूबती , फिर कैसे खेता  इसे।।


भाषा कहती है भाव को, कह लो मन की बात ये।

संप्रेषण जब सच्चा रहे ,पहुँचे सबकी गात ये ।।


मंगल की करती कामना ,शेरों वाली आ रही ।

करतल ध्वनि से स्वागत करो, माता वर बरसा रही।।


साबुन अति निर्मल तन करे, करता रोगों का नाश ये।

  मन भी हर्षित हो रहा,  सस्ता होवे काश ये।।


अर्चना पाठक'निरंतर'

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डॉ मंजुला हर्ष श्रीवास्तव 'मंजुल'


कोरोना का काल यह,संकट है विकराल।

मानव ने ही रच दिया,मानव  हित यह जाल।।


 जीवन  राहों में भरे,संकट कंटक संग।

संघर्षों से जीतिये,चाहे डसें भुजंग।।


संकट से हो सामना,शक्ति बढ़े अपार।

सोया साहस जागता, करिये स्वयं विचार।।


माता जब भी देखती,संकट में संतान।

बनकर ममता  शेरनी  ,करती सदा निदान।।


पितुश्री घर की छाँव हैंं,सहते संकट रोज।

अंधड़ ओले झेलते,मुख पर रहता ओज ।।


डॉ मंजुला हर्ष श्रीवास्तव 'मंजुल'

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परमजीत सिंह कोविद ,कहलूरी


घर का मुखिया कड़वा सही, रखता सबको जोड़ कर।

मुखिया बिन परिवारिक कलह, रख देती झंजोड़ कर।।

 

नन्हीं गुड़िया जिस घर वहां, मां देवी का वास हो।

बिन मांगे ही सबकुछ मिले, सुख सुविधा की आस हो।।


हर रचना ईश्वर ने रची, सबकी निज पहचान है।

अपना करते सब काम वो, दुनिया की बन शान है।।


 जननी की जय गाओ सदा, दुख सहती संतान का।

पूजा नित वंदन करो, फलदायक सोपान का।।


हे सविता तेरी लालिमां, सारी दुनियां लोर में।

नव आशाएं भी जग रही, पंछी क्रंदन भोर में।।


यमुना तट बजती बांसुरी, लहरें भी क्रंदन करें।

कान्हा के नन्हे पांव को, सब वासी वंदन करें।।


रोचक मनभावन गीत से, गूंजे वृंदावन गली।

भक्तों के कटते कष्ट सब, भारी हर विपदा टली।।


अंबर में तारे घूमते, नूतन आशा को जगा।

सूरज बनता फिर रत्न है, तम अंधेरे को भगा।।


रेखा मेरी अर्धांगिनी, रेखा सीमा बांधती।

रेखा कागज पर खींचते, हथ मस्तक को लांघती।।


तीरथ यात्रा पावन बने, शुभ कर्मों का योग हो।

कर पूरे सेवा भाव से, सुख सुविधा का भोग हो।


परमजीत सिंह कोविद, कहलूरी

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Sunday, 28 March 2021

संजय कौशिक विज्ञात जी का जन्मोत्सव...


 

कलम की सुगंध साहित्यिक समूह के संस्थापक संजय कौशिक 'विज्ञात' जी का जन्मदिवस 28 मार्च 2021को कलम की सुगंध के सभी मंचों पर मनाया गया। होली के पावन दिन गुरुदेव का जन्म दिवस होना यह ऐसा सुखद संयोग है जिसके कारण प्रतिवर्ष सभी कलमकार दोहरी खुशी का अनुभव करते हैं। परिवार के सदस्यों द्वारा जहाँ बधाई संदेशों की बरसात हो रही थी वहीं गुरुदेव को समर्पित अनेक रचनाएँ प्रेषित की गई जो किसी बहुमूल्य उपहार से कम नही हैं। हर्षोल्लास के सहभागी बने सभी सदस्यों के लिए यह दिवस अविस्मरणीय बन गया। इस विशेष अवसर पर "पुष्पमाला ई बुक" के माध्यम से रचनाकरों के सृजन को प्रकाशित किया गया। पूनम दुबे वीणा, सरोज दुबे विधा, शरद अग्रवाल, कुसुम कोठारी प्रज्ञा इन सभी की सस्वर प्रदतुती ने इस पर्व को बहुत ही सुरीला और आकर्षक बना दिया।उन यादगार क्षणों से कुछ रचनाएँ आपके सामने प्रस्तुत करने जा रहे हैं।

जन्मदिवस के अवसर पर गुरुदेव को सपर्पित शब्द सुमन 🙏

मिलेगी ज्ञान में जिनके,  तपस्या इक समंदर की
झुकाकर शीश उस पग में, ऊँचाई छू लें अम्बर की
बड़े ही भाग्य से मिलते है सच्चे साथ गुरुवर के
बहे नित काव्य की नौका फिकर कब है बवंडर की

नीतू ठाकुर 'विदुषी'

जन्म दिन की आपको
बहुत बधाई आज
रंग अबीर गुलाल से
माला माल हो साज i
सकल रंग रंग से भरे
दामन रंग चमकाय
यश गौरव विज्ञात जी
पल पल बढ़ता जाया !
happy bday 🎂🎂🍓🍓

ड़ा यथार्थ

*जन्मदिन के अवसर पर गुरुदेव को समर्पित* ---

1.जनमदिन आज गुरुवर का
चलो मिलकर मनाते हैं
खुशी के फूल पग उनके   सभी मिलकर चढ़ाते हैं
गगन में चाँद तारों सा चमक उनकी सदा  बिखरे
सफलता नित मिले उनको  यही हम गीत गाते हैं ll

2.चले कब ज्ञान की नैया लहर में डूब वो जाती
बने पतवार जब गुरुवर
तभी आगे निकल पाती
बिना गुरुवर नहीं मिलता जगत में ज्ञान तुम जानो
मिले आशीष गुरुवर का किनारे नाव तब आती

*सरोज दुबे 'विधा'*

आ0 गुरुवर विज्ञात जी के जन्मदिवस पर
जन्मदिवसस्य अनेकशः शुभकामना:
सुयश: भवतु, विजय:भवतु

उल्लाला छन्द

जन्मदिवस शुभकामना,करें आप स्वीकार ये।
आलोकित हो पथ सदा,रहे सफलता सार ये।।

सौम्य सहज व्यक्तित्व अरु,मुखड़े पर मुस्कान है।
संजय गुरु विज्ञात की,यही श्रेस्ठ पहचान है।।

हिंदी के उत्थान में,करते सतत प्रयास हैं।
भाषा सेवा लक्ष्य रख,सदा किया अभ्यास हैं ।।

मुखिया हैं परिवार के,पूरी करते आस ये।।
मार्ग प्रदर्शक आप बन,लिखें नया इतिहास ये।।

सुखमय भविष्य हो सदा,सुखी रहे परिवार सब।
सदा ईश आशीष से,खुशियाँ मिले अपार सब।।

मन भावुक सा हो रहा,मिला आप का स्नेह जो।
परम सौभाग्य से मिला,श्रेस्ठ साहित्य गेह जो।।

रचनात्मक अभिव्यक्ति और सीखने सिखाने की परंपरा का निर्वहन करते  हुए आपने अपने कुशल नेतृत्व से कितनों को ही गढ़ा है।
मेरा सौभाग्य है कि मैं इस संस्थान और परिवार का हिस्सा हूँ ।
ईश्वर आपको अपार यश ,सुख समृद्धि और स्वास्थ्य
प्रदान करें।

अनिता सुधीर आख्या

आदरणीय गुरु जी के जन्मदिन पर गुरु जी को समर्पित।
***********
उल्लाला छंद
***********
गुरु महिमा
*********
जिसे गुरु की शरण मिले,
वो  भवसागर  पार  है।
जहां गुरु का मान नहीं,
वो  हिय पृथ्वी भार है।

ज्ञान  पुंज  विज्ञात हैं,
जो सीखे वो तर रहा।
सिद्ध हो रही मापनी,
छंद कटोरा भर रहा।

आंख बंद थी चल पड़े,
कौन बिठाए  नाव में।
हाथ दिया गुरु आपने,
सीखा सब ठहराव में।

चुन-चुन  मोती  डालकर,
सब  रचनाएं  लिख रहा।
गुरु की औषधि का असर,
हर  रचना में  दिख  रहा।

आज धरा कल डाल पर,
जिनको है संतोष कम।
जिससे सीखो गुरु वही,
खुद में दिखते दोष कम।

      *परमजीत सिंह "कोविद"*
                *कहलूरी*
           *हिमाचल प्रदेश*

कलम की सुगंध छंदशाला की मुख्य मंच संचालिका अनिता मंदिलवार सपना जी ने इस विशेष अवसर पर 'उल्लाला छंद शतक वीर' कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह का  सुंदर संचालन किया । कार्यक्रम की अध्यक्ष डॉ अनिता भारद्वाज अर्णव जी ने अपने अध्यक्षीय भाषण के बाद अपने शब्द सुमन प्रेषित किये...

लबों पर हो सदा मुस्कान पल- पल तू निखर जाए ।
सुगंधी पुष्प सी बनकर यहां पर अब सँवर जाए।
मिले हर रंग का गौरव तुझे जगमग ज़माने में ,
मगर इक रंग स्वर्णिम सा दिवाना बन ठहर जाए।🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🌹🌺🌹🌺🌹🌺🌹🌺🌹🌺🌺🌹🌺🌹🌺🌹🌺🌹🌺🌹🌹🌺🌹🌺🌹🌺🌹🌺🌺🌹🌹🌺🌹🌺🌹🌺🌹🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

इस आयोजन के विशेष अतिथि वरिष्ठ कवि और महफ़िल-ए-ग़ज़ल के संचालक धर्मराज देशराज जी ने कहा---

सन 1975 में उलाला छंद
को
हायर सेकेंडरी में गाईड और कुंजियों के माध्यम से पढ़ा था।
अगर विज्ञात जी जैसे गुरु उस समय मिल जाते तो शायद इस काव्य-गंगा में स्नान कर लेता।
मगर उस समय कुछ शायर मिल गए
और
शायरी का रोग लगा बैठा।
बहुत आनन्दित करने वाली विधा है छंद।

हाइकु विश्वविद्यालय के मुख्य संचालक नरेश कुमार जगत 'प्रज्ञ' जी ने बधाई देते हुए कहा--

वाह्ह... बहुत ही शुभ तिथि में कलम के वीर आ. गुरुदेव संजय कौशिक "विज्ञात" साहब का अवतरण हुआ है। हमें आप पर नाज है, आप सदैव स्वस्थ्य रहें और चीर काल तक सूरज की तरह दमकते रहें, जिससे हम सभी पोषित हों । सादर नमन् व अनेकानेक हृदयतल से मंगल बधाई🌷🌹💐🌺🥀🌸🌷🌹💐🌺🥀🌸👏👏👏👏👏👏👏👏👏आज हमारे लिए विशेष तिथि है, पार्टी तो बनती है 😀😃😄😁🙏🌷🙏🌸🙏🥀🙏🌺🙏💐🙏🌹

हाइकु विश्वविद्यालय की व्यवस्थापक अनुपमा अग्रवाल जी ने आयोजन के विषय में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा--

आज का जन्मोत्सव बहुत ही शानदार रहा👏👏👏👏👏सभी कलमकारों की लेखनी से निकले एक से बढ़कर एक सुंदर शुभकामना संदेश वाकई मन को हर्षित करने वाले थे।और गायन में पटल पर सभी एक से बढ़कर एक हैं ही तो उन सभी ऑडियो शुभकामनाओं को सुनकर मन पुलकित है, हर्षित है।
आदरणीय सर का आभार गीत अद्भुत है।
ई- पुष्प और सभी बैनर्स की जितनी भी प्रशंसा करूँ कम ही लगती है।
नीतूजी अपने अथक प्रयासों से हर विशेष दिन को एक महोत्सव बना देतीं हैं।
आज होली के इस पावन उत्सव के दिन आदरणीय के जन्मदिवस ने उत्सव को महोत्सव बना दिया।
ई- पुष्प में भी सर ने अपने अनोखे अंदाज़ में हम सभी को कृतार्थ किया।🙏🙏
आज त्योहार का दिन होने से अति व्यस्तता के चलते इस सुंदर कार्यक्रम में अनुपस्थित रहने का बेहद अफसोस है।
एक बार फिर सभी को इस सुंदर कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए बहुत बहुत बधाई! आदरणीय  सर को पुनः एक बार जन्मदिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनायें!।सभी को होली के पावन पर्व की अशेष बधाइयाँ।

सभी का आभार व्यक्त करते हुए गुरुदेव संजय कौशिक विज्ञात जी ने कहा--

आप सभी का आत्मीय आभार ज्ञापित करता हूँ
आप सभी ने जन्म दिवस के छोटे से हर्ष के विषय को न केवल उत्सव बल्कि मेरे जीवन के सबसे बड़े महोत्सव में परिवर्तित कर दिया जिससे हर्ष पुलकित हो कर अम्बर को छू रहा है 🙏🙏🙏
आप सभी को नमन 🙏🙏🙏

गीत
पूर्ण महोत्सव योग कहें
संजय कौशिक 'विज्ञात'

मापनी ~ 16/14

साधारण से हर्ष विषय को
उत्सव सा उद्योग कहें
उत्सव तो ये सबने देखा
पूर्ण महोत्सव योग कहें।।

देख कलम की सुगंध हर्षित
गीत अचानक कुछ महके
नूतन सा फिर ओढ़ दुशाला
बिम्ब कथन उत्तम चहके
गज़लों की महफ़िल भी गुंजित
वाह वाह सब लोग कहें।।

हाइकु मर्यादित सागर सा
श्रेष्ठ विश्वविद्यालय है
सपनों ने हो शायद देखा
विस्तृत तेज हिमालय है
सबने ढेर बधाई भेजी
खण्ड काव्य संजोग कहें।।

काव्य विधा सुन श्रेष्ठ युक्ति है
माला भाव पिरोने की
नित्य सृजक बन छंद रचाएं
खड़ी लेखनी सोने की
सब कवियों ने मंगल गाया
मिटता सारा रोग कहें।।

हृदय सदा आभार कहेगा
कंठ भरा अवरुद्ध पड़ा
शीशे का इक खोल बनाकर
हीरा कुनबा मध्य जड़ा
नेह भाव को दिन ये अर्पित
निर्मित छप्पन भोग कहें।।

संजय कौशिक 'विज्ञात'

इस सफल आयोजन की सभी को अनंत शुभकामनाएं 💐💐💐




Thursday, 25 March 2021

उल्लाला छंद विधान उदाहरण सहित


 उल्लाला छंद - उल्लाला छंद के प्रायः दो भेद होते हैं 2 पंक्ति 4 चरणों में दोहे की तरह दूह कर लिखा जाने वाला यह छंद अपने आकर्षण के चलते सर्वत्र विख्यात है इस छंद का प्रथम भेद 

दोहे के विषम चरण की 13 मात्राओं के मात्रा भार और शिल्प का अनुकरण करते हुए इसी एक चरण के शिल्प को लगातार 4 चरणों में लिखने से उल्लाला छंद का प्रथम भेद निर्मित होता है जो कवियों द्वारा लेखन में अत्याधिक प्रचलित रहा है।


इसी प्रकार इसका द्वितीय भेद प्रचलन में कम रहा है तदापि इसकी उत्तम लय आकर्षण का केंद्र रही है इसका शिल्प भी दोहे के विषम चरण की 13 मात्राओं के शिल्प में 2 मात्राएं और जोड़ देने के पश्चात विषम चरण 15 मात्राओं का तथा सम चरण दोहे के विषम चरण 13 मात्राओं में दोहे के विषम चरण के शिल्प का अनुकरण करना होता है। इस प्रकार से उल्लाला के द्वितीय भेद के शिल्प में  4 चरणों का मात्रा भार  15-13 और 15-13 रहता है।


उल्लाला छंद का द्वितीय भेद जिसका मात्रा भार 15,13 और 15,13 रहता इस छंद के शिल्प में विशेष ध्यान में रखने वाली बात ये है कि इसके प्रारम्भ में चौकल अनिवार्य है परन्तु जगण वर्जित है। इस छंद की लय गाल-लगा के प्रयोग सी गुथी हुई होती है। अपनी उत्तम लय के कारण इसकी गेयता का आनंद चरम पर होता है। श्रोता भी इसकी उत्तम लय के विशेष आकर्षण के चलते आनंद प्राप्त कर झूम उठते हैं। तुकबंदी सम चरण द्वितीय और चतुर्थ चरण की मिलाई जाती है। आइये उदाहरण के माध्यम से समझते हैं । 


उदाहरण


ये नदिया बहती पूछती, 

लहरों के क्या काम हैं।

कश्ती ये बहती बोलती, 

लहरें मेरे धाम हैं।।


निर्धनता है अभिशाप है, 

भोगें निर्धन लोग हैं। 

राजनीति की यह चाल या, 

विधना के संयोग हैं।।


ये नदिया बहती बोलती, 

लहरों ठहरो आप मत।

तिर पाएगी कश्ती तभी, 

करलो श्रम हो आज नत।।


संजय कौशिक 'विज्ञात'

*उल्लाला शतकवीर कार्यक्रम में समीक्षक समूह द्वारा किस गलती से अंक काटे जा सकते हैं इस ओर सभी अपना ध्यान दें और इसे कंठस्थ करलें तथा कहीं सुरक्षित भी अवश्य करलें।* (प्रारंभ - 30.04.2021)


*उल्लाला 15/13 मात्रा भार के साथ लेकर लिखना है* 


मापनी की दृष्टि से समझें 

22 22 2 212, 22 22 212

22 22 2 212, 22 22 212


*कुछ अन्य सावधानी*

1 जगण का प्रयोग चारों चरणों के प्रारम्भ, मध्य और अंत में वर्जित रहेगा

2 चौकल से प्रारम्भ करना अनिवार्य है। और लय आल्हा छंद की तरह गुँथी हुई होनी अनिवार्य है।

3 विषम जो 15 मात्रा के चरण हैं। चरण 1 और 3 में 13 वीं मात्रा लघु रखनी अनिवार्य है। संक्षेप में समझें 10 मात्रा के पश्चात (212) अनिवार्य है।

4 सम चरण 2 और 4 में 11वीं मात्रा लघु रखनी अनिवार्य है ये चरण शिल्प की दृष्टि से दोहे के विषम चरण 1,3 की तरह ही लिखे जाएंगे। संक्षेप में समझें तो 8 मात्रा के पश्चात (212) अनिवार्य है।

5 त्रिकल का प्रयोग त्रिकल के साथ अनिवार्य है और विशेष ध्यान रखें कि त्रिकल 21,12 ✅ ये ही प्रयोग कर सकते हो 2121❌ 12 12❌ 1221❌ *तो ध्यान रहे इस कार्यक्रम में लिखी जाने वाली रचनाओं में त्रिकल के साथ त्रिकल का मात्र एक ही रूप स्वीकार्य है वो है 21,12 इसके पृथक त्रिकल के पश्चात त्रिकल का कोई भी रूप मान्य नहीं रहेगा* 

6 वैसे प्रयास ये करें कि पूरी रचना में किसी भी त्रिकल से बचा जा सके अंतिम 3 मात्रा को छोड़ कर। 

7 यदि 111 तीन एक मात्रा भार वाले त्रिकल का प्रयोग करना पड़े तो यह किसी भी चरण के अंत में ही करना होगा इससे पृथक कहीं भी वर्जित है। 


त्रिकल प्रयोग मत करें

👉केवल द्विकल चौकल से ही पूर्ण करें 

त्रिकल या तगण अंतिम 5 मात्रा में (212) की लय साधते समय लगा सकते हैं बस .....


आप सभी की सुविधा के लिए नियम का सरलीकरण किया जा रहा है 


क्योंकि त्रिकल का एक ही रूप जो मान्य है उस पर कई बार भाव बिखर जाते हैं या ये कहें कि भाव के अनुरूप जो कहना चाहते वो नहीं कह पाते इसी लिए 

उल्लाला छंद सृजन करते समय विषम चरण की पहली 10 मात्रा और सम चरण की पहली 8 मात्रा में मात्र द्विकल और चौकल का ही प्रयोग करना है। 


संजय कौशिक 'विज्ञात'

Wednesday, 10 March 2021

झारखंड कलम की सुगंध मंच का विश्व महिला दिवस के अवसर पर जमशेदपुर में काव्य गोष्ठी का आयोजन

 


आज झाड़खंड कलम की सुगंध ने विश्व महिला दिवस के अवसर पर जमशेदपुर में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।कलम की सुगंध झारखंड प्रांत की अध्यक्षा आरती श्रीवास्तव ने बताया कि आज की अध्यक्षता आ.प्रतिभा प्रसाद जी ने किया। विशिष्ट अतिथि आ.शैल जी एवं बसंत जमशेदपुरी जी एवं संतोष चौबे जी थे।मंच संचालन निवेदिता श्रीवास्तव ने किया।सभी विशिष्ट अतिथि को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। प्रतिभा प्रसाद जी ने गिनिज बुक में अपना नाम दर्ज करा पूरा झाड़खंड वासियो का सर गर्व से ऊंचा किया है।उनकी उपस्थिति सबको गौरवान्वित कर रही थी।आज की गोष्ठी में शहर की प्रतिष्ठित कवियित्री सोनी सुगंधा, उपाध्यक्ष निवेदिता श्रीवास्तव,नीता चौधरी, अनिता निधि, माधुरी मिश्रा, उपासना सिन्हा,उसकी सुपुत्री तोषी सिन्हा, सुष्मिता मिश्रा, शकुंतला शर्मा,सरोज सिंह, ममता सिंह, एवं निर्मला राव शामिल हुई। निवेदिता श्रीवास्तव ने मंच संचालन किया।सरोज सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया। सबसे पहले माँ सरस्वती के सामने दीपक प्रज्वलित कर उन्हें पुष्प माला अर्पित अध्यक्ष और विशिष्ट अतिथियों ने किया। फिर सभी ने माँ के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित किया।।सभी सदस्यों की प्रस्तुति एक से बढ़ कर एक रही।

संतोष चौबे जी की कुछ पंक्तियां

कोई भजन कोई गीत शादी का सुनायेगें तुम्हें।

कुछ मंदिरों तो कुछ घरौंदो में सजायेगें तुम्हें।

सुन सभी श्रोता वाह वाह कह उठे।

वहीं सोनी सुगंधा जी का गजल लोगों को दिल को छू गई।

उन्हीं के शब्दों में

"उल्फत कुछ दास्तां है जरा गौर से सुनो।

हर दर्द ही जवां है जरा गौर से सुनो।

वहीं निवेदिता श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति कुछ इस प्रकार थी।

"शहर में गांव की लड़की तुम्हें याद आती तो होगी।

वहीं अमुया के झुले है वहीं कागज की कश्ती है" 

सुन लोगों को बरबस गांव की याद आ गई।

मेरी बेटी मेरा अभिमान



बेटी है तू मेरी

नहीं कहूँगी बेटा

बेटा जैसी बोलकर

नहीं करूँगी अपमान तेरा


तू गर्व है मेरा

मेरा अभिमान है तू

तू अंश है मेरा

मेरा वंश भी तू

  उपासना

आभार व्यक्त आरती श्रीवास्तव जी ने किया।

आज का गोष्ठी का उद्देश्य सफल सिद्ध हुआ।













Tuesday, 16 February 2021

कलम की सुगंध - बसंत पंचमी साहित्यिक उपनामकरण समारोह २०२१

 


कलम की सुगंध परिवार द्वारा आज १६/०२/२०२१ को  बसंत पंचमी के पावन पर्वोत्सव पर शाम ४:०० बजे  साहित्यिक उपनामकरण समारोह का आयोजन हुआ। इस आयोजन में देश के अनेक राज्यों से कवि और कवयित्री जुड़े। इस समारोह में रचनाकरों को प्राप्त साहित्यिक उपनाम उन्हें साहित्य जगत में विशेष स्थान दिलाये तथा उनका भावपूर्ण सृजन एवं सशक्त लेखन अटल ध्रुव की तरह स्थापित हो कर निरन्तर धुतिमान रहे ..

परिवार की इन्ही मंगलकामनाओं के साथ बसंत पंचमी पावन पर्वोत्सव की हार्दिक बधाई सभी सहभागी साथियों को और आपको 


इस समारोह से जुड़कर उपनाम प्राप्त करने वाले साहित्य साधकों की सूची ....


1 रानू मिश्रा 'अजिर'

2 सपना नेगी 'कुमकुम'

3 परमजीत सिंह 'कोविद'

4 रमा श्रीवास्तव 'रम्या'

5 कंचन वर्मा 'विज्ञांशी'

6 रिंकू मोगरे 'निष्णात'

7 मीना सिन्हा मीनू मीनल

8 सुगम शर्मा 'वागीश्वरी'

9 रीना सिंह 'गुनिता'

10 संतोषी देवी 'सगुणा'

11 अनुराधा कुमारी 'एहसास'

12 कौशल शुक्ला 'विज्ञांश'

13 डा. सीमा अवस्थी 'मिनी'

14 अजित कुमार कुम्भकार 'निर्भीक'

15 शिशुपाल गुप्ता 'विद्यांश'

16 सुषमा शर्मा  'चित्रा'

17 सरला झा 'संस्कृति'

18 हरिओम अवस्थी 'भावुक'

19 निर्मल जैन 'स्वस्तिक' 

20 सीमा सिन्हा 'मैत्री'

21 निवेदिता श्रीवास्तव 'गार्गी'

22 देवेन्द्र कुमार 'विख्यात'

23 किरन कुमार 'दधीचि'

24 रीना गुप्ता 'श्रुति'

25 हेमा जोशी 'स्वाति'

26 बेलीराम कनस्वाल 'प्रारम्भिक'

27 नंदी बहुगुणा 'कीर्ति'

28 आशा तिवारी 'अग्रिमा'

29 सुखमिला अग्रवाल 'भूमिजा'

30 मीनाक्षी जायसवाल 'स्वरा'

31 शरद अग्रवाल 'नव्या'

32 अंजना सिन्हा 'नवनीता'

33 वीणा कुमारी 'नंदिनी'

34 सुनीता श्रीवास्तव 'जागृति'

35 अनिता निधि 'दीपशिखा'

36 प्रवीणा श्रीवास्तव 'रश्मि'

37 सविता सिंह 'हर्षिता'

38 बिंदू प्रसाद 'रिद्धिमा'

39 कृष्णा श्रीवास्तवा रत्नावली

40 सरोज गर्ग 'रत्नप्रभा'

41 उपासना सिन्हा 'काव्यशिखा'

42 मनोज सिंह 'यशस्वी' 

43 पूनम सिन्हा 'भावशिखा'

44 कविता सिन्हा 'शिल्पशिखा'

45 संध्या चौधुरी 'उर्वशी'

46 सुदीप्ता जेठी राउत 'कृतिशिखा'

47 पद्मा प्रसाद 'विन्देश्वरी'

48 सरोज सिंह 'विमला'

49 मुनमुन ढाली 'इंदुप्रभा'

50 श्वेता 'विद्यांशी'

51 महेंद्र सिंह 'विजेता'

52 मीरा द्विवेदी 'शचि'


इस विशेष अवसर पर गुरुदेव संजय कौशिक 'विज्ञात' जी ने सभी को बधाई देते हुए कहा कि...

 मंच द्वारा दिये जा रहे आपके इस उपनाम की यश कीर्ति दसों दिशाओं में शुक्ल पक्ष के चंद्रमा की भांति बढ़ती एवं चमकती रहे। आपका सृजन सदैव समाज कल्याण के लिए अग्रसर होकर मार्गदर्शक के रूप में अपनी एक अलग पहचान बना सके, सभी रसों में आपकी सशक्त लेखनी का प्रवाह प्रशंसनीय रहे और निरन्तर प्रगति पथ पर बढ़ते ही रहें ...💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐


सहभागी कलमकारों ने एक दूसरे को बधाई दी और मंच का आभार व्यक्त किया


कौशल शुक्ला ''विज्ञांश'' जी ने कहा....


उपनाम समारोह के अवसर पर गुरुवर 'विज्ञात' जी  के चरणों में समर्पित एक सृजन 


इससे अच्छा क्या धाम जहाँ में होगा?

कोई प्यारा उपनाम जहाँ में होगा


प्यारे वसंत ने सबके मन को जीता 

पेड़ों में बौर लगी है, पतझड़ बीता  

अंतर की वीणा झंकृत होना चाहे

माथे पर शोभा अंकित होना चाहे


यह कृपादृष्टि गुरुवर से पायी ऐसे

मां वीणापाणि प्रकट हो आयी जैसे  

माना नव-अंकुर हैं हम इस उपवन में

बरसे प्रोत्साहन धार मधुर जीवन में 


उर्वर धरती अपनी किसान श्रमरत है

'विश्वास लिए घनघोर सृजन में रत है 

जैसे भी हो इस श्रम का फल पाना है 

फलदार वृक्ष बनकर ही दिखलाना है  


'विज्ञांश' धीर ही है जीवन का दर्शन

अब छोड़ निराशा स्वयं जगाओ तन-मन

गुरुवर के पद को छूकर आज्ञा पालो 

चमकेगा जीवन, यही राह अपना लो 


रचनाकार - कौशल शुक्ला 'विज्ञांश'

रचना दिनांक-१६-०२-२०२१

🙏🙏


उपनाम प्राप्त करने वाले सभी मित्र रचनाकारों को हार्दिक बधाई 

आप सब के सुनहरे भविष्य की कामना के साथ कुछ पंक्तियां प्रेषित हैं-


गुरुजन पर जिनका भी विश्वास अटल है 

रचनाएँ लिखना उनके लिए सरल है

उपनाम नहीं, समझो वरदान मिला है

सृजनोत्सुक जन को नव-उत्थान मिला है


सपने देखें हर रोज, जियें सपने को 

इस योग्य बनायें हम कविजन अपने को 

तप से ही बहुधा सम्यक ज्ञान मिला है 

लड़कर ही जीवन में सम्मान मिला है


💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

नंदी बहुगुणा 'कीर्ति' जी ने कहा 


हार्दिक धन्यवाद सभी आदरणीय जनों को जिन्होंने आज नामकरण समारोह में  आज मुझे एक अनमोल उपहार दिया माता पिता एक नामकरण समारोह करते हैं और उससे हम अपने नाम से जीवन भर पहचाने  जाते हैं जाते हैं साहित्यिक उपनाम तो किसी कवि साहित्यकार के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है और जब प्रबुद्ध जनों द्वारा वह नाम रखा जाए तो वह साहित्यकार भाग्यशाली होता है क्षमा प्रार्थी हूं कि मैं एक प्रशिक्षण में थी इस कारण मैं इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बन सकी फिर भी आदरणीय जनों ने ने इस  नामकरण समारोह मे मुझे जैसी एक छोटी सी कवित्री को अपने समारोह में स्थान दिया और मेरा नाम का नामकरण किया इसके लिए मैं आपकी कृतज्ञ रहूंगी

नंदी बहुगुणा कृति अध्यापिका चंबा टिहरी गढ़वाल🙏🙏🙏🙏🙏


अजित कुंभकार 'निर्भीक' जी ने कहा ...


उपनाम करण में गुरुजी संजय विज्ञात जी को नमन साथ ही साथ नीतुजी को दिल से आभार , उपनामकरण समारोह में आपका योगदान देखकर अभिभूत हूँ कोटिशः कोटिशः आभार नमन ,अपना उपनाम को हमेशा सही साबित करने की कोशिश करूंगा , पुनः गुरुजी को कोटिशः नमन नीतुजी को नमन सह आभार , सभी कलमकारों को दिल से बधाई 🌹🙏🙏🌹🙏🌹🍁🙏🙏🙏🙏🌺🌺🌷🙏🙏🥀🍂🌺🌷🍁🌹🙏


शरद अग्रवाल 'नव्या' जी की भावाभिव्यक्ति ....


आ० गुरुदेव के श्री चरणों में सादर  समर्पित


नाम दिया गुरु आपने', है अद्भुत अभिराम I

चरणों में रख शीश मैं,शत-शत करूं प्रणाम।l

'नव्या' हर्षित हो रही, पूर्ण हुई है आस।

गुरु की आशीषें मिलें, फैले कलम सुवास ॥

नवल सृजन नित मैं रचूँ, बहे काव्य की धार।

शब्दों में भर ओज माँ, बन जाओ पतवार ॥

,---- शरद अग्रवाल 'नव्या'

हृदय से कोटि कोटि धन्यवाद एवं नमन गुरुदेव🙏🏿🙏🏿🙏🏿🙏🏿💐💐💐💐💐💐🌹🌹🌹🌹🌹

अपने आशीर्वचन से हमारा मार्गदर्शन करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय गुरुदेव । 🙏🏿🙏🏿🌹🌹🌹💐💐💐जैसा कि आपने कहा हम आपकी अपेक्षाओं पर उतरने का पूर्ण रूप से प्रयास करेंगे, वास्तव में हम भाग्यशाली है कि हमें इस पावन मन से जुने का अवसर मिला है।

प्रिय सखी नीतू जी की जितनी प्रशंसा की जाए कम है उन्होंने सचमुच उन्होंने बहुत ही सुंदर नामकरण पत्र सृजित किए हैं और इतना सुंदर कार्यक्रम आयोजित किया है निश्चित रूप से वह इसके लिए बधाई के पात्र हैं, आपका हृदय से स्नेहिल आभार प्रिय नीतू जी🙏🏿🙏🏿🌹🌹🌹💐💐💐😘😘

देवेंद्र कुमार 'विख्यात' जी ने कहा 


आदरणीय गुरुदेव व सभी विद्वान एवं विदुषी जनों को देवेन्द्र कुमार का प्रणाम। आप सभी को बसंत पंचमी पर्व की अनेकों शुभकामनाएँ। जिन साथियों को उपनाम दिए गए है उन्हें भी बहुत बहुत शुभकामनाएँ। आशा करता हूँ की जो उपनाम दिए गए है हम सभी उसको सार्थक करने का प्रयास करेंगे। किसी कार्य में व्यस्तता के कारण कार्यक्रम में सम्मिलित नहीं हो पाया। इसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ।


नीतू ठाकुर 'विदुषी' जी ने गुरुदेव और सभी साथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा ...


आपकी बात से पूर्णतः सहमत हैं गुरुदेव। साहित्य एक गंभीर विषय है और उसे गंभीरता से ही लेना चाहिए। आत्मसुखाय लेखन से हट कर विविध विधाओं पर और रसों पर खुदको परखना चाहिए। साहित्य साधना सरल नही पर योग्य मार्गदर्शन से शीघ्र सुधार निश्चित ही सम्भव है। साहित्य जगत में एक से बढ़कर एक कलमकार हैं उनके बीच हमें प्रयास अवश्य करना चाहिए कि हमारी रचना सर्वश्रेष्ठ भले न हो पर प्रसंशनीय अवश्य हो और यह निरंतर प्रयास से ही संभव है। कोई भी विधा इतनी कठिन नही होती कि उसे सीखा न जा सके ...बस थोड़ा समय देने की आवश्यकता होती है।और यह भी सत्य है कि जिनमें सीखने की लगन होती है वे लक्ष्य को प्राप्त कर ही लेते हैं।हमारा सौभाग्य ही है जो हम कलम की सुगंध मंच से जुड़े और आपका मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। साहित्य की सही परिभाषा समझने का अवसर मिला। अनेक विधाओं पर लेखनी चली और आगे भी सीखने की इच्छा जीवित है।साहित्य की इस यात्रा में बहुत दूर तक जाना है इसलिए अपना स्नेहाशीष बनाये रखियेगा 🙏

परमजीत सिंह 'कोविद' जी ने दोहे के माध्यम से अपना आभार व्यक्त किया








सफल आयोजन की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं 💐💐💐💐💐

Wednesday, 10 February 2021

मन की वीणा कुण्डलियाँ संग्रह : कुसुम कोठारी 'प्रज्ञा'


शुभकामना .... 

कवयित्री कुसुम कोठारी प्रज्ञा द्वारा रचित मन की वीणा कुण्डलियाँ एकल संकलन जिसमें कवयित्री द्वारा100 रचनाएं ली गई हैं लेखन कौशल, शब्द चयन, छंद शिल्प, भाव पक्ष सहित समीक्षक के दृष्टिकोण से देखें तो यह एक अनुपम संग्रह निर्मित हुआ है। अतुकांत कविता से छंद की और पग बढ़ाना तथा इतने कम समय में छंद विधा को आत्मीयता तथा गहनता से अपना लेना  किसी चमत्कार से कम नहीं है प्रज्ञा ने अपने नाम की सार्थकता को सिद्ध कर दिखाया है।  साधारण पाठक के दृष्टिकोण से देखें तो पाठक रचनाओं को पढ़ते समय रचना प्रति रचना एक लेखन कौशल के मोहिनी मंत्र से सम्मोहित हुआ दिखता है जैसे मैं अपने ही बारे में बताऊँ तो मैंने जब इस संकलन को पढ़ना शुरू किया तो आकर्षण पाश इतना सशक्त आभास देता प्रतीत हो रहा था कि अनायास ही अग्रिम रचना की और बढ़ने का मन करता रहा और यह संग्रह पढ़ने में पूर्ण हो गया फिर भी पढ़ने की पिपासा शांत न हो सकी ऐसे में कवियित्री से प्रज्ञा से विशेष आग्रह है कि कुण्डलियाँ का एक और संग्रह अवश्य निकालें।  कलम की सुगंध छंदशाला मंच का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय रहा जिसमें क्लिष्ट विधा को सरलता से सिखाया और लिखवाया गया जिसमें कवयित्री वर्ग एक नूतन इतिहास लिख कर दिखाया। कहते हैं कि कवयित्रियों ने कुण्डलियाँ छंद अभी तक इतना नहीं लिखा था परन्तु कलम की सुगंध मंच को देखें तो यह तथ्य मिथक सा प्रतीत होता है यहाँ पर छंदशाला में कवयित्रियाँ न केवल छंद लिखती हैं बल्कि छंद लिखवाती भी हैं मंच के प्रयास सराहनीय हैं मुख्य संचालिका अनिता मंदिलवार सपना तथा समीक्षक समूह के विशेष प्रमुख बाबूलाल शर्मा बौहरा, इंद्राणी साहू साँची, अर्चना पाठक निरन्तर के सहयोग से शतकवीर कार्यक्रम वीणापाणि, हंसवाहिनी, सस्वती समीक्षक परिवार में 10- 10 समीक्षक स्थापित करते हुए एक अद्भुत आयोजन कर दिखाया जिसकी अन्य मंचों पर भी जम कर प्रशंसा हुई। 

कुसुम कोठारी प्रज्ञा की पुस्तक मन की वीणा छंद विधा के पाठकों को तृप्ति प्रदान अवश्य करेगी। पाठकों को यह संग्रह खरीदकर अवश्य पढ़ना भी चाहिए। इस संग्रह पर लगाए गए पैसे पूर्णतः एक उत्तम दिशा में लगेंगे। यह संग्रह मन को प्रफुल्लित कर आनंद प्रदान करने में सफल कहाँ तक रहा अवश्य बताएं .... ? 

 पाठक की प्रोत्साहना ही लेखनी को एक नई दिशा प्रदान करती है मुझे विश्वास है यह सशक्त लेखनी एक दिन बड़े नाम के रूप में अवश्य स्थापित होगी इन्हीं शुभ कामनाओं के साथ ।

संजय कैशिक 'विज्ञात'

Monday, 23 November 2020

कलम की सुगंध



 

लाख बधाई जन्म दिवस की 

विदुषी सदा प्रसन्न रहे।

दूर रहें विपदा जीवन की

खिलता मधुबन पुष्प कहे।।


चांद चाँदनी की वर्षा कर

राग मल्हार सुनाये फिर

हर्ष गीत क्षण की वीणा पर

मध्य्म सुर में गाये फिर

छाये फिर खुशियाँ अनुपम सी

इंद्र धनुष सा रंग बहे।।


वरे शारदे छंद लेखनी

उत्तम काव्य प्रवाह बने

कहें वाह सब श्रोता पाठक

भाव पढ़ें वे गूढ़ घने

पर्व मने फिर नित्य दिवाली 

अंधेरा ले घात सहे।।


आज कलम की सुगंध तुमको 

मंगल भाव प्रदान करे

बढ़ो प्रगति पथ पर तुम नित ही 

साधो अपने लक्ष्य खरे

थके डरे बिन इतना चमको

ऊँचे से ध्रुव अटल डहे।।



संजय कैशिक 'विज्ञात'

संस्थापक (कलम की सुगंध)


कलम की सुगंध परिवार की तरफ से महाराष्ट्र कलम की सुगंध समूह की अध्यक्ष नीतू ठाकुर 'विदुषी' जी को जन्मदिन की अशेष शुभकामनाएं 💐💐💐



नीतू ठाकुर 'विदुषी'

अध्यक्ष (महाराष्ट्र कलम की सुगंध)


आज विदुषी धन्य हुई हैं

स्वयं गुरु ने जिन पर लेख लिखा

स्वर अब मुखरित हो जायेंगे

सरगम को उन्माद दिखा।


प्रिय नीतू ,


‌मंगलमय हो आपको नया ये बसंत

जो जीवन में लाये खुशियों की तरंग।।

आप हँसते रहो मुसकुराते रहो

खुशियाँ ही खुशियाँ लुटाते रहो।।


जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ।


                        कुसुम कोठारी

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चले निरन्तर जीवन यात्रा पूरे बरस हजार 

हर पड़ाव पर घुलता जाये रंग अबीर गुलाल  ॥ 


जनम दिन की बहुत बहुत बधाई सखी नीतू जी 

हर सुख वैभव तेरे साथ हो ' 

हर राह बने आसान 

मस्तक पर यश की आभा हो बन जाओ दिन मान ॥ 


🎂🌾💐☕😍💞

डॉ़ इन्दिरा  गुप्ता यथार्थ


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आ.नीतू जी 

जन्मदिन आपका

आपको ढेरों बधाई

चाहे वह थोड़ी देरी से आईं

कहा दिल ने तुम हो लेट

फिर सोचा

शुभ काम में काहे की वेट!

चलो मनाते हैं आपका जन्मदिन 

शुभकामनाएँ देते हैं गिन गिन 🌟🌟

जन्मदिन मुबारक बहना जी 

सदा सुखी ,स्वस्थ व सम्पन्न रहें

हर वर्ष दूने जोश से जन्मदिन मनाते रहें ।

🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂

माता रानी का आशीर्वाद रहे आप पर

परिवार की खुशियाँ बढ़ती रहें निरंतर

💐💐💐💐💐💐💐💐

आकाश की हर ऊँचाई हो आपकी धुरी

हर आकाँक्षा हो आपकी हमेशा पूरी

😊😊😊😊😊😊😊😊

 अपने कार्यक्षेत्र में बढ़ती जाएँ

जीवन में ऊँचा मुकाम आप पाएँ ।

🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸

आप जीओ हजारों साल ,साल के दिन हों पचास हजार...........

हैप्पी बर्थड़े टू यू डियर नीतू जी 

हैप्पी बर्थड़े टू यू.....

🎂💐🌟🍿🍺🍦🍹🍰

प्रभु आशीर्वाद हैंअनगिनत

शुभकामनाएँ हैं असीमित

करती हूँ मातारानी से यह प्रार्थना

जीवन खुशियों से महकता रहे ये मंगलकामना💞💞

जन्मदिन मुबारक नीतू जी 

परिवार में सभी को बधाई

                 नीरजा शर्मा


💮🌈💮🌈💮🌈💮🌈💮🌈💮🌈💮🌈💮


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प्यारी नीतू बहना के लिए


विदुषी जिसका नाम है, सृजन करती छंद ।

नवगीत लिखे नित दिवस, हाइकु सृजन चंद ।।


सपना🎤🌹🌹

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जन्मदिन की शुभकामनाएं


जन्मदिवस शुभकामना,करें आप स्वीकार।

आलोकित हो पथ सदा,खुशियां मिले अपार।।


सौम्य सहज व्यक्तित्व अरु,मुख पर है मुस्कान।

स्वर वीणा के तार से,झंकृत हो पहचान ।।


मार्गदर्शिका आप हो,रखतीं सबका ख्याल।

निर्झर ये जीवन रहे,करिये सृजन कमाल।।


सुखमय भविष्य हो सदा,सुखी रहे परिवार।

नाम रूपता दीप्ति सी,नीतू जी अवतार।।


मन भावुक सा हो रहा,मिला आप का स्नेह।

अनदेखे रिश्ते बने,सजा लेखनी गेह।।


अनिता सुधीर आख्या

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*जन्मदिन की ढ़ेरसारी* *शुभकामनाएं प्रिय *नीतू जी*  💐💐🍫🍫🍫🍫🍨🍨🎂

कुछ पंक्तियाँ हमसब की तरफ से....  


बड़ी प्यारी सहेली हो,मुबारक जन्म दिन तुमको l

सदा ही मुस्कुराना तुम नहीं छूना कभी गमको l

करें हम याद हरदिन ही मगर मिलना नहीं होता

सदा हँसते हुए रहना 

गगन में चाँद सा चमकोl


*सरोज दुबे 'विधा'*

*रायपुर छत्तीसगढ़*

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*नीतु बहन को‌ जन्म दिन पर चंद दोहे समर्पित*🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🎂🎂🎂🎂🎂🎂🍬🍬🍬🍬🍬🍬🍬🍬🍬🍬😊😊😊


नीतू बहना आप हैं,  कलम पटल की शान। 

देते हम शुभ कामना , खिले सदा मुस्कान ।। 


प्यारी प्यारी नीतु जी, बोलें मीठे बोल ।

रहे हँसी मुख पर सदा, सृजन करें अनमोल ।।


*धनेश्वरी देवाँगन धरा*


💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐


सभी मित्रो को व गुरूजनो को भोर का नमन सा 


नित्य  करे  सत्संग  सब, होगा बेङा  पार।

सत की नाव सदा तरे,महिमा बङी अपार।।


मदन सिंह शेखावत ढोढसर स्वरचित


🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀🥀


सपने देखे जो आप ने,हो पूरे अरमान दी। 

 फूलों जैसे नभ में खिलो,बने लेख पहचान दी।।


हर पग हो गम से दूर दी, मन से हम कहते यही।

आप रहो दी जिस स्थान पर ,खुशी भरा जग हो वही ।।


बहे प्रेम की धारा सदा,  मिले यही उपहार दी ।

फूलों जैसी हो ये हँसी, खुशियाँ मिले अपार दी।। 


*जन्म दिवस की बहुत बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनाएँ दीदी जी*

🌹🙏🌹🎂💐

©चमेली कुर्रे 'सुवासिता'


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*आदरणीया नीतू जी को समर्पित* 


बिना आपके लग रहा, सूना सूना गाँव ।

आ जाने से आपके, मिली है शीतल छाँव ।


नीतू जी के जन्म से, मिली एक आवाज,

पढ़कर रचना आपकी, धन्य हुए हम आज ।


धन्य आपका मिल गया, हमको दर्शन लाभ ।

मधुर गीत गा लग रही, जैसे कोई अमिताभ ।


जैसी   सुन्दर   लेखनी,  वैसी ही   आवाज ।

अद्भुत प्रतिभा की धनी, बनी आज सरताज ।


   नित उन्नत पथ पर चलें, शिखर चढ़ें बस आप। 

ज्ञान मिले हमें आपसा, करते निस दिन जाप।

 *आपको जन्मदिन की हार्दिक* *शुभकामनाएँ।* 

  

अर्चना पाठक निरंतर अम्बिकापुर छत्तीसगढ़


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जीवन सुरभित खुशियों से हो, जीत मिले हर पग पर नित्य।

मधुरभाषिणी सबकी प्यारी, मृदुल स्वभाव  बात ये सत्य।।

शुभकामना सदैव हमारी, राह जीत की हो आसान।

हर सपना साकार आपका, पूरे हों सारे अरमान।।


जन्मदिवस की अनंत बधाइयां आदरणीया नीतू जी


गीता द्विवेदी

🌹🌹🌹🌹🌹💐💐💐💐💐💐💐🙏🙏🙏


नीतू नीतू सब कहें, नीतू सबकी मीत। 

निश्छल निर्मल हास्य से, लेती मन को जीत॥

बिन नीतू जी मंच पर, होता नहीं प्रकाश।

ऐसी मीठी मोहनी, भरती सब मन आश॥


जन्मदिन 🎂 की हार्दिक शुभकामनायें सखी। हंसतीं रहें। 😘 हंसाती रहें। 🤗


गीतांजलि 'विधायनी'


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विदुषी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹


मधुर मधुर मुस्कान से, लेती मन को जीत।

  जैसे सदियों से रही,  मेरी प्यारी मीत।।

🎂🎂🎂🎂🎂

सुंदर मुखड़ा चांँद सा, हंँसी में झरते फूल।

 छंद छंद मोती बना, रखती हो अनुकूल।।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹



*आशा मेहर 'किरण' रायगढ़ छत्तीसगढ़*


🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿


एक कुशल संचालिका, अद्भुत उनका ज्ञान ।

स्वस्थ सुखी जीवन रहें, बढ़े जगत में मान ।।


नीतू जी जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।🎉🎉💐💐

अमिता श्रीवास्तव 

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आद. नीतू "विदुषी"जी

अवतरण दिवस की अनंत शुभेच्छाएँ..


नीतू जी नित नव छंदों को शब्दाभूषित ज्यों करतीं।

शतकवीर-नवगीत,  छन्द शाला का ज्यों प्रणयन करती।

त्यों प्रभु सदा आपके जीवन-आँगन में खुशियाँ भर दे।

असमंजस अवसाद अनिच्छित को अंतरमन से हर ले।

जन्मदिवस हो शुभ मंगलमय और कामना पूर्ण सभी हों..।

रहें साधनारत साहित्यिक, पथ से कब्भी  नही प्रथक हो...।।


बहुत बहुत बधाई और अस्सीम शुभेच्छाएँ

जीवेद् शरदःशतम्.💐💐💐💐.


(कृष्णमोहन निगम)


🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾🌾


करते हैं यह कामना,

 जियो हजारों साल।

 रहे हमेशा संग हम,

 समय रहे जो हाल।।


जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं🌹🌹🌹🍿🥧


 चंद्र किरण  शर्मा भाटापारा


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जीवन  में महके सदा ,बेला औ गुलनार।

 नीतू तेरा जन्मदिन, आये सौ -सौ  बार।।


प्रमिला पान्डेय


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खुशी मिले सब आप को,

मिले बधाई गीत।

जनम दिवस बेला सभी,

सखियाँ हो नव प्रीत।।


*जन्मदिन की बधाई व शुभकामनाएं*

कन्हैया लाल श्रीवास 'आस'


🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂🎂


जन्म दिवस शुभ कामना, कर लेना स्वीकार ।

मंगलमय सब काज हो आये बारम्बार ।।


मदन सिंह शेखावत ढोढसर


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🎈🎈 *आदरणीय नीतू बहना को अशेष बधाईयाँ.....*🎉🎉🎊🎉🎉 🎈🎈

*तुम‌ जियो हजारों साल,*

*साल भर खुशियों की बौछार....* 👌💐💐

*साथ हो अपनों का प्यार*

*नेह रंग भरा मिले उपहार...*

  डा. सीमा अवस्थी ,भाटापारा,🙏🙏


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परमजीत सिंह ,कहलूरी, हिमाचलप्रदेश