Thursday, 24 February 2022

शोधपत्र : वर्तमान संदर्भ में रचनात्मक लेखन के विविध आयाम


शोधपत्र तथा शोधसार प्रेषित करने की अंतिम तिथि - 07 मार्च 2022 
अणुडाक -dranitabhardwaj2011@gmail.com

भूमिका 
विषय वस्तु 
मुख्य अंश 
परिणाम व सुझाव सहित लिखना है।

शोध पत्र 
1000 से 1500 शब्द में 
शोध सार 
200 से 250 शब्द में


 आइये आज जानते हैं कि शोध पत्र कैसे लिखें 

शोधपत्र का अर्थ (Meaning Of Research Paper)- क्या है ? 

शोधपत्र, शोध रिपोर्ट या शोध कार्य का व्यावहारिक प्रस्तुति योग्य सार आलेख है जो परिणाम को अन्तिम रूप में समेट भविष्य की दशा तथा दिशा निर्धारण में सहयोग कार्य करता है। 

“पत्र पत्रिकाओं (Journals) में प्रकाशित होने वाले अथवा संगोष्ठियों (Seminars) व सम्मेलनों (Conferences) में वाचन हेतु तैयार किये गए अनुसन्धान कार्य सम्बन्धी लेखों को प्रायः अनुसंधान पत्रक (Research Paper) का नाम दिया जाता है।”


शोध प्रपत्र लेखन कार्य आलोचनात्मक, सृजनात्मक तथा चिंतनशील स्तर का है। शोध प्रपत्र लेखन में एक विशिष्ट प्रक्रिया का अनुसरण करना होता है जिसमें समुचित क्रम को अपनाया जाता है।”

अतः उक्त आलोक में कहा जा सकता है कि शोध प्रपत्र सम्पूर्ण शोध के परिणाम व सुझाव से युक्त वह प्रपत्र है जिसमें स्व विचार के स्थान पर तथ्य निर्धारण तत्पर शोध आधारित दृष्टिकोण से वास्ता रखता है।

शोध प्रपत्र के प्रकार (Types Of Research Paper)-

कुछ विद्वतजनों द्वारा सुझाये गए सुझावों को कुछ विशेष प्रकारों को इस प्रकार क्रम दे सकते हैं –

विवाद प्रिय या तार्किक शोध पत्र (Argumentative Research Paper)

कारण प्रभाव शोध पत्र (Cause and Effect Research Paper)

विश्लेणात्मक शोध पत्र (Analytical Research Paper)

परिभाषीकरण शोध पत्र (Definition Research Paper)

तुलनात्मक शोध पत्र (Contrast Research Paper)

व्याख्यात्मक शोध पत्र (Interpretive Research Paper)

शोध प्रपत्र का प्रारूप (Research Paper Format)-

शोध पत्र लिखने का कोई पूर्व निर्धारित प्रारूप सभी प्रकार के शोध हेतु निर्धारित नहीं है शोध कर्त्ता का सम्यक दृष्टि कोण ही शोध प्रपत्र का आधार बनता है फिर भी अपूर्णता से बचने हेतु सभी प्रमुख बिंदुओं को सूची बद्ध कर लेना चाहिए। दिशा, प्रवाह, अनुभव, अवलोकन सभी से शोध पत्र को प्रभावी बनाने में मदद मिलती है सामान्यतः शोध प्रपत्र प्रारूप में अधोलिखित बिन्दुओं को आधार बनाया सकता है। –

(अ)- भूमिका

(ब)- विषय वस्तु

(स)- मुख्य अंश

(द)- परिणाम व सुझाव

संक्षेप में भूमिका लिखने के बाद विषय वस्तु से परिचय कराना चाहिए यहीं शोध शीर्षक के बारे में लिखकर मुख्य अंश के रूप में शोध प्रक्रिया, उपकरण व प्रदत्त संग्रहण, विश्लेषणआदि के बारे में संक्षेप में लिखते हुए प्राप्त परिणामों को सम्यक ढंग से प्रस्तुत करना चाहिए व इसी आधार पर सुझाव देने चाहिए अपने दृष्टिकोण को थोपने से बचना चाहिए।


अच्छे शोध प्रपत्र की विशेषताएं (Characteristics Of a Good Research Paper ) या

अच्छे शोध प्रपत्र के लाभ (Advantage Of a Good Research Paper )-

शोध प्रपत्र लिखना और सम्यक सन्तुलित शोध प्रपत्र लिखने में अन्तर है अतः प्रभावी शोध पत्र लिखने हेतु आपकी जागरूकता के साथ निम्न गुण, विशेषताओं का होना आवश्यक है तभी समुचित लाभ प्राप्त होगा।

(1 )- नवीन ज्ञान से संयुक्तीकरण।

(2 )- शोध कार्यों सम्बन्धित दृष्टिकोण का सम्यक विकास।

(3 )- पुनः आवृत्ति से बचाव।

(4 )- परिश्रम को उचित दिशा।

(5 )- विभिन्न परिक्षेत्र के शोधों से परिचय।

(6 )- समीक्षा में सहायक।

(7 )- विशेषज्ञों के सुझाव जानने का अवसर।

(8 )- शक्ति व धन की मितव्ययता।

(9 )- अनुभव में वृद्धि।

(10 )- प्रसिद्धि में सहायक।

सम्पूर्ण शोध पत्र लेखन के उपरान्त यदि वैदिक काल की मर्यादा के अनुसार सन्दर्भ ग्रन्थ सूची भी देनी अनिवार्य होती हैं ताकि कृतज्ञता ज्ञापन के साथ-साथ दूसरे शोध कर्त्ताओं को मदद प्राप्त हो सके ।



Saturday, 5 February 2022

कलम की सुगंध साहित्यिक उपनामकरण समारोह 2022




बसंत पंचमी के पावन अवसर पर कलम की सुगंध परिवार द्वारा आज दिनांक 5.2.2022 को दोपहर 12:30 बजे साहित्यिक उपनामकरण समारोह का आयोजन किया गया। इस आयोजन में सभी को उनके लेखन कौशल को देखते हुए आकर्षक उपनाम प्रदान किये गए। 












सभी साथियों को बधाई देते हुए गुरुदेव संजय कौशिक 'विज्ञात' जी ने कहा -


 माँ वीणापाणि की असीम अनुकम्पा आप सभी पर बनी रहे। आज बसंत पंचमी के पावन पर्व पर गत वर्षों की भांति साहित्यिक उपनामकरण समारोह के आयोजन में 9+2= 11 कवि एवं कवयित्रियों को साहित्यिक उपनाम दिया जा रहा है। माँ वीणापाणि आपको साहित्य जगत में स्थापित कर आपकी लेखन शैली को निखार सहित निर्विघ्न कथन प्रवाह, रस प्रवाह, सशक्त कथ्य, छंदोबद्ध लेखन, शब्द-शक्ति से परिपूर्ण कर आलंकारिक दृष्टिकोण तथा नव्यता का नूतन परिवेश दें माँ वीणापाणि से इस प्रकार विनम्र भाव से प्रार्थना के पश्चात आपके लेखन में चमत्कृत ढंग से चमकने तथा तथा पाठकों द्वारा नित्य सराहे जाने की मंगलमयी कामना प्रेषित करता हूँ ...

आप सभी प्रदत्त उपनाम के साथ साहित्य जगत में अपनी उपास्थिति को दर्शाएँ और नित निरंतर प्रगति पथ पर बढ़ते रहें ... 💐💐💐 

प्राप्त उपनाम का यश चहुँ दिश शुक्ल पक्ष के चंद्रमा की तरह नित निरन्तर बढ़ता रहे अनंत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ 💐💐💐


- संजय कौशिक 'विज्ञात'

पूरे परिवार के लिए यह अवसर अत्यंत हर्षपूर्ण रहा। अनेक कवि कवयित्री इस अविस्मरणीय क्षण के साक्षी बने। सभी साथियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ  💐💐💐




Thursday, 6 January 2022

मुहावरेदार लेखन - परमजीत सिंह 'कोविद' कहलूरी

 

गुरुदेव संजय कौशिक 'विज्ञात' जी की प्रेरणा से कलम की सुगंध विज्ञात नवगीत माला मंच पर मुहावरेदार लेखन पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस आयोजन में आदरणीय परमजीत सिंह 'कोविद' जी ने सभी का मार्गदर्शन किया। इस चर्चा का कुछ अंश आप सभी के सामने प्रस्तुत करने जा रहे हैं ताकि आप भी उसका लाभ उठा सकें।

संचालक : नीतू ठाकुर 'विदुषी' 

मुख्य वक्ता : परमजीत सिंह 'कोविद' कहलूरी




प्रश्न:-1मुहावरेदार कथन क्या है??


उत्तर:- आमतौर पर हमने देखा है कि मुहावरे जो भी बात कहते हैं उसका अर्थ कभी भी स्पष्ट रूप से नजर नहीं आता। मुहावरे की भाषा हमेशा संकेतिक होती है। मुहावरा कम शब्दों में किसी बड़ी बात की ओर संकेत करता है।


अर्थात संक्षेप में कहा जाए तो मुहावरेदार कथन का अभिप्राय यही है कि हम अपने वक्तव्य को कुछ इस तरह से प्रस्तुत करें कि उसका अर्थ सीधा और सपाट ना होकर किसी और अर्थ का संकेत करे।


प्रश्न -2 नवगीत संरचना में मुहावरेदार भाषा का चयन जरूरी क्यों?


उत्तर:- ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार मुहावरा सुनने में अच्छा लगता है और समझने में हम उस आनंद लेते हैं उसी प्रकार एक नवगीत की संरचना में मुहावरेदार भाषा काम करती है कवि अपने शब्दों को कुछ इस तरह से व्यक्त करता है कि उसके वाक्य मुहावरों की तरह किसी अलग दिशा में संकेत करते जाते हैं और नवगीत का एक नया और स्पष्ट अर्थ दर्शाते जाते हैं। इसीलिए नवगीत में मुहावरेदार और लच्छेदार भाषा का प्रयोग करने के लिए कहा गया है।


प्रश्न:-3 क्या सीधे और स्पाट वाक्यों वाली रचना को नवगीत स्वीकारा जा सकता है?


उत्तर:- नहीं ऐसा बिल्कुल नहीं है।

नवगीत की विशेषता ही इसे स्वीकार आ गया है कि इसमें स्पाट कथन वर्जित हैं। कभी को अपनी बात सीधे-सीधे रखने पर मनाही है क्योंकि सीधे और सपाट कथन गीत का हिस्सा तो हो सकते हैं पर नवगीत का नहीं।

घुमावदार कथन के साथ-साथ मुहावरेदार और लच्छेदार भाषा से नवगीत में चार चांँद लग जाते हैं।


प्रश्न:-4 मुहावरेदार भाषा का प्रयोग किस तरह किया जाए?


मुहावरेदार भाषा के प्रयोग के लिए अपनी रचना से संबंधित कुछ मुहावरेदार शब्द समझ में रखिए और नए बिंब का प्रयोग करके उसके कथन पर मुहावरेदार भाषा को जोड़िए। साथ में यह बात ध्यान रखने योग्य है कि आप अपने रचना के अर्थ को साथ लेकर आगे बढ़ते रहें।मुहावरेदार भाषा के प्रयोग के लिए यह आवश्यक नहीं है कि जो मुहावरे पहले से चलन में हैं आप उन्हीं का प्रयोग करें बल्कि आप अपने बनाए हुए नए कथन भी शामिल कर सकते हैं। अपनी बातों को घुमा फिरा कर मुहावरों की तरह पेश करते जाएंँ। ताकि आपकी रचना रहस्यमई लगे। रचना के अर्थ संकेतिक भाषा में और प्रतीकों के माध्यम से बताए जाएँ।

बिंब जो काम करता ना हो वह काम उससे करवाना है। जिससे रचना आकर्षित लगे और पाठकों को इसका आनंद आए।


प्रश्न:-5

निर्धारित मापदंडों पर यदि आपकी रचना सही ना उतरे तो विचलित होने की आवश्यकता है या नहीं??


आदरणीया हेमा जोशी जी का प्रश्न


उत्तर:- मेरे विचार से यदि आपकी रचना निर्धारित मापदंडों पर सही नहीं उतर रही है फिर भी आपको घबराने की आवश्यकता नहीं है। आपको अनवरत प्रयास करते रहना है क्योंकि प्रयास से ही रचना श्रेष्ठ होगी।यदि आपकी रचना नवगीत विधा में मान्य नहीं हो तो भी वह किसी न किसी विधा में मान्य जरूर होगी क्योंकि रचना तो रचना है उसमें आपने अपने भावों को सृजित किया है। शब्दों को पूरी मेहनत से उकेरा है और एक निश्चित शैली में माला के रूप में पिरोया है तो निश्चित रूप से घबराने की या विचलित होने की आवश्यकता नहीं है आपका लगातार लिखने का प्रयास ही आप को महान साबित करता है अपनी हर एक कमी को पूरा करते हुए धीरे धीरे रचना के निर्धारित मापदंडों पर एक ना एक दिन आपकी रचना उत्कृष्ट अवश्य बनेगी ऐसा मेरा मानना है।


नवगीत की विशेषताएं


1.जड़ाऊ शिल्प

2.श्रेष्ठ तुकांत

3.घुमावदार भाषा

4.मुहावरेदार कथन

5.बोलते बिंब

6. शब्दों का सटीक चयन

7. घनिष्ठ संबंधित प्रतीक

Thursday, 30 September 2021

झारखंड कलम की सुगंध स्थापना दिवस आयोजन (प्रथम)

 

झारखंड कलम की सुगंध का प्रथम स्थापना दिवस 30.09.2021 को बड़े ही धूमधाम से जमशेदपुर झारखंड में मनाया गया। साथियों की उपस्थिति ने आयोजन में चार चांद लगा दिए। इस अवसर पर झारखंड कलम की सुगंध की अध्यक्ष आदरणीया आरती श्रीवास्तव 'विपुला' जी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा ...

आज बड़ी ही खुशी का दिन है।झाड़खंड कलम की सुंगध मंच पर आज हम सब इसकी स्थापना दिवस मनाने के लिए एकत्रित हुये है।इसके संस्थापक आ. संजय कौशिक विज्ञात जी है जो अनेक छंदो के ज्ञाता है और छः नये छंद के प्रणेता भी।इस मंच का उद्देश्य भी यही हैं कि हम नये नये छंद सीख सके और अपनी लेखनी को धार दे सके।मुख्य अतिथि के रुप में मंच पर आसिन आ. प्रतिभा प्रसाद जी एंव विशिष्ट अतिथि आ.बंसत जमशेदपुरी जी भी अनेक छंदो के ज्ञाता हैं।बंसत जमशेदपुरी जी को हम दोहा किंग के भी नाम से जानते है।हम इन दोनो महारथियों के मार्गदर्शन में बहुत कुछ सीख सकते है कहते है न कि सीखने की कोई उम्र नही होती,बस हमे सीखने की जज्बा को जगाना है।

मैं नीतू ठाकुर विदूषी जी का आभार व्यक्त करती हूँ कि उन्होंने कलम की सुंगध झाड़खंड मंच को हमेशा सहयोग दिया ताकि हम सब एक साथ एक मंच पे आकर अपनी लेखनी को साझा करे और एक दूसरे से बहुत कुछ सीखते हुये आगे बढ़ते रहे।इस मंच को पालित पोषित करने में निवेदिता श्रीवास्तव जी का अमूल्य योगदान है । वीणा पांडे भारती जी एंव मनीषा सहाय सुमन जी एंव सबीता सिऔह हर्षिता जी का भी काफी सहयोग रहा ।मंच संचालिका किरण कुमारी जी कुशलता से मंच संचालित कर रही है।इन सब से बढ़कर आप सभी है जिनसे मंच सदैव गुलजार रहता है।झाकंती हिय आंगन कविता हम सब की सांझा संकलन बहुत जल्द हमारा हाथो में होगी और फिर बहुत जल्द बाजार मे धूम मचायेगी।सालो भर अपनी लेखनी चलाने वाले या फिर कोई कारण से अपनी लेखनी प्रतिदिन नहीं चला पाये है मैं उन सबके लिए मां शारदे से प्रार्थना करती हूँ कि वे उनकी लेखनी को धार दे ताकि हम सब नये नये कीर्तिमान स्थापित कर सके।आप सबका साथ यूं ही मिलता रहे ,इन्ही आंकाक्षाओं के साथ मैं अपनी शब्दों को विराम देती हूँ।

धन्यवाद।


झारखंड कलम की सुगंध में प्रान्त के अनेक जानेमाने कवि   हैं जिनके मार्गदर्शन में नवांकुरों की लेखनी भी निखरती जा रही है। सभी एक दूसरे का सदैव सहयोग करते हैं यही इस मंच की विशेषता है। आरती जी के मार्गदर्शन में मंच प्रगति पथ पर अग्रसर सर है। उनका कार्य सभी के लिए बहुत ही प्रेरणादायक है। समय-समय पर होने वाली प्रतियोगिताएँ और कविसम्मेलन साथियों में ऊर्जा का संचार करते रहते हैं। इस मंच को सशक्त बनाने में उपाध्यक्ष निवेदिता श्रीवास्तव 'गार्गी' जी, महासचिव वीणा पांडे 'भारती'जी, सचिव मनिषा सहाय 'सुमन' जी, उपसचिव सबिता सिंह 'हर्षिता' जी, मंच संचालिका किरण कुमारी जी का योगदान अविस्मरणीय है। ऐसे आयोजन भविष्य में भी होते रहेंगे इसका हमें विश्वास है। कलम की सुगंध के सभी मंचों की ओर से इस आयोजन की अनंत बधाई और शुभकामनाएं 💐💐💐💐💐💐💐💐





छायाचित्रों में कैद कुछ अविस्मरणीय क्षण ...




































Friday, 25 June 2021

गीत - यह मुमकिन नहीं है : जसवीर सिंह हलधर

आज फेसबुक और व्हाट्सएप पर अनेक सुंदर सुंदर रचनाएं देखने पढ़ने को मिल जाती हैं ऐसे ही गीतकार हलधर के गीतों को पढ़ना उन्हें भीड़  से अलग करता है सुंदर शब्द शिल्प आकर्षक भाव और सरल भाषा के प्रयोग से हलधर जी के गीत अलग सा दृश्य बनाकर अनुपम छटा बिखेरते हैं 

कविवर जसवीर सिंह 'हलधर' जी के इस प्रयास से जुड़ कर आप की भी सुखद अनुभूति का आभास अवश्य होगा ...

- संजय कौशिक 'विज्ञात'





गीत - यह मुमकिन नहीं है

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झूँठ का सच से करूँ व्यापार यह मुमकिन नहीं है ।

मान  लूँ कठिनाइयों से  हार  यह मुमकिन नहीं है ।।


रात मेरी आँख से काजल चुराया चांदनी ने ।

जल गए सपने सुहाने कहर ढाया दामिनी ने ।

सांस अब भी चल रही है , जिंदगी को छल रही है ,

छोड़ दूँ मैं हाथ से पतवार यह मुमकिन नहीं है ।

मान लूँ कठिनाइयों से हार यह मुमकिन नहीं है ।।1


राह का मैं वो मुसाफिर जो कभी  रुकना न जाने ।

काव्य का रस्ता चुना है छोड़ कर सारे ठिकाने ।

खार भी कुछ अनमने हैं ,फूल भी पत्थर बने हैं,

जीत लूँ मैं लोभ का संसार यह मुमकिन नहीं है ।

मान लूँ कठिनाइयों से हार यह मुमकिन नहीं है ।।2


काम की रति भी यहां पल भर नहीं आराम पाती ।

काल की गति भी यहां पर नित नए पैगाम लाती ।

मुड़ रहा हूँ वासना से ,जुड़ रहा हूँ साधना से ,

खुल न पायें चेतना का द्वार यह मुमकिन नहीं है ।

मान लूँ कठिनाइयों से हार यह मुमकिन नहीं है ।।3


चार दिन की रोशनी है इन अँधेरों की डगर में ।

मौत ही पक्की सहेली जन्म से पनपे सफर में ।

प्रश्न का उत्तर न पाया ,घूम सारा विश्व आया ,

गीत में "हलधर" लिखे शृंगार यह मुमकिन नहीं है ।

मान लूँ कठिनाइयों से हार यह मुमकिन नहीं है ।।4


हलधर -9897346173




Thursday, 24 June 2021

माहिया छंद - डॉ विजेंद्र पाल शर्मा


 वरिष्ठ कविवर  डॉ. विजेंद्र पाल शर्मा सहारनपुर की सशक्त लेखनी काव्य रस की अनेक विधाओं में पूर्णाधिकार से जम के चलती है इन्हें पढ़ने का और लाइव सुनने का जब-जब सौभाग्य प्राप्त हुआ तब-तब इनके शब्द शिल्प और भावों ने कुछ हटकर आकर्षण की छाप छोड़ी है ऐसे में प्रस्तुत हैं इनकी शशक्त लेखनी से अंकुरित माहिया छंद -- संजय कौशिक 'विज्ञात'

पढ़िए और आप भी आनंद लीजिये ...




क्या उससा कोई है
 फूलों में खुशबू
 क्या खूब पिरोई है

 तितली को रंग दिए
 ऊपर वाले ने
 सब माहिर दंग किए 

मत जी लाचारी में
 श्रम के गहने रख
 तन की अलमारी में

 घूंघट खोलो राधे
 कृष्ण खड़े दर पर
कर नयनों के बांधे

 जो प्रेम पुजारी हैं
 वे ही जीने के
 सच्चे अधिकारी हैं

 हम प्रेम पुजारी हैं
 कंस सामने हो
 तो कृष्ण मुरारी हैं

 चल सूरज बन जाएँ
 खु़द जलकर जग का
 अंधियारा पी जाए्ँ

 दिल भर - भर कर आया
 वह था संग सदा
 मैं देख नहीं पाया

 सुख चाहो जीवन में
 काँटे मत बोना
 औरों के आँगन में

 हम जितना रूठेंगे
 उतने मीठे पल 
हाथों से छूटेंगे 

घूँघट खोलो राधे
कृष्ण खड़े कब से
अपनी साँसें साधे

डॉ विजेंद्र पाल शर्मा 
5 / 3151 न्यू गोपाल नगर 
नुमाइश कैंप
 सहारनपुर 247001
 मोबाइल 941243 5728


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Monday, 21 June 2021

माता-पिता श्री को समर्पित वैवाहिक वर्षगाँठ बधाई गीत


गुरुदेव के माता-पिता श्री को समर्पित वैवाहिक वर्षगाँठ बधाई गीत ....*💐💐💐


हर्षित जीवन पुलकित ये मन

इस दिन की हरबार बधाई

हर्ष बसंत करे अभिनंदन 

कोयल की दे तान सुनाई।। 


*गुरुदेव संजय कौशिक 'विज्ञात'*


जीवन का उपहार समर्पण

नेह त्याग विश्वास समेटे

खेल रहे हिय के आँगन में

सात वचन बाँधे नव फेटे

परिणय का दिन जब-जब आता

लाता स्मृतियों की तरुणाई।। 


*नीतू ठाकुर 'विदुषी'*


शुभ दिन पावन हस्त मिलन का

सौरभ पुलकित सबके आँगन

झूम रही ऋतु मृदुल तान पर

सुरभी सुर की लगती पावन

धरती अंबर बाँट रहे यूँ

मोदक मेवे और मिठाई।। 


*सौरभ प्रभात*


मात पिता के साथ रहे जो,

सच में वे होते बड़भागी।

ईश्वर गुरुजन की सेवा मय

पितर चरण सेवा अनुरागी।

बरगद सी शीतल छायाँ में,

ओट हिमालय सी अछनाई।

हर्षित.......................

।। 

*बाबू लाल शर्मा बौहरा विज्ञ*


तृण प्राणों के आज प्रफुल्लित,

फिर महके ऑंगन स्नेह भरा।

हरी-भरी परिवारिक बगिया,

गौरव वैभव से गेह भरा।

गान मनोहर गाते पंछी,

अब बोले सरगम शहनाई। 


*परमजीत सिंह कोविद*


मिलता रहे आशीष इनका

चाहती "वीणा" ये कमाई

संग इनके ही रहके सदा

इस जीवन में खुशियांँ छाई

घर आँगन में फूल बरसता

मीठी चलती है पुरवाई। 


*पूनम दुबे "वीणा*


मात पिता सम तुल्य न कोई,

वे ही गुरु अरु भाग्य विधाता।

शुभ दिन परिणय का आया है,

जन्मों का हो जीवन नाता।

उर बगिया के वे रखवारे,

पुष्प उँडेले खुशियाँ छाई। 


*दीपिका पाण्डेय 'क्षिर्जा'।*


चित्र बसा कर उर में सुंदर

भाव शब्द को ढूँढ़ रहा है।

कलम कहे धीरे से आकर

पृष्ठों ने कब प्रेम कहा है।

यही कामना आख्या की है  

जीवन में हो नित ऊंचाई।। 


*अनिता सुधीर 'आख्या'*


मिल जाती जब दो आत्माएँ,

सात वचन दोनों ही माने।

बिन बोले  ही सब समझाये,

दोनों पूरक बनकर जानें।।

आज खुशी का दिन आया है,

खुशियाँ बाँटे आज सवाई।। 


*मधुसिंघी*


मात पिता का उपहार हमें,

जीवन दान मिला है सबको ।

प्रेम की प्रतिमा हैं ये सभी ,

देवों  सा स्थान मिला इनको ।।

सात वचन का मान ये सभी,

 जीवन इनका हो सुखदाई ।।


*सरला झा 'संस्कृति'*


ऊँगलिओं का दिया सहारा 

नन्हें पाँव जब  लड़खड़ाए 

हो जाते व्याकुल क्षण भर में 

जब भी हम पर विपदा आए 

बधाई के क्या शब्द लिखूँ 

सोंच मूढ़ मैं हूँ भरमाई ।।


*श्वेता विद्यांसी*


शहनाई के मधुर स्वरों में

मंगल गीत सभी ने गाए

मेंहदी रचे हाथ में कँगन

खनक खनक कर मोद जगाए

उठे पैर पैजनिया छनके

मांग सजी सूरज अरुणाई।।


 *कुसुम कोठारी 'प्रज्ञा'*


संग चले बन चाँद चकोरी 

हर सुख दुख सहते साथ रहे ।

वचन निभाते सातों फेरे 

थामें हाथों में हाथ रहे ।

सुखद अल्पना स्मृति से सज्जित

मन के आँगन में मुस्काई ।।


*इन्द्राणी साहू"साँची"*


आशीषों की झड़ी लगा के

आँगन सुंदर पुष्प खिलाए।

मात-पिता से घर की खुशियाँ

बार-बार ये शुभ दिन आए।

वैवाहिक जीवन सुखमय हो

खुशियाँ ले रहीं अंगड़ाई।


*अनुराधा चौहान'सुधी'*


सुखद सुयोगों की यह वेला

अति सुंदर  और सुपावन है

स्वर्णिम परिदृश्य मनोरम सा

शुभ क्षण यह जग मनभावन है

शाश्वत सूत्र सनातन है पर

प्रथा पुरातन है फलदाई।।


*वंदना सोलंकी'मेधा'*


भोर लालिमा आनंदित हिय

पुष्प कली सह चौक पुराए।

बंदनवार लगा पुरवाई

झूम झूम फिर मंगल गाए।

देख प्रफुल्लित चटका चिड़िया

नयनों ने निज खुशी जताई ।।..


*पूजा शर्मा "सुगन्ध"*


सद्यःस्नाता शुभ्रांगी सी

महके इठलाये कली कली।

आज मिलन की इस बेला में

गूँजे शहनाई गली गली।

मंद मंद सी पुरवाई भी

फिर होकर मगन गुनगुनाई।।


*अनुपमा अग्रवाल 'वृंदा'*


बंद लिफाफों में आज छिपा 

पग -पग में फिर उपहार मिले ।

बात करे आकाश धरा से 

है अंतर्मन में फूल खिले ।

सुख - दुख के पथ मिलकर चलते 

भर आँचल में खुशियाँ लाई।।


*चमेली कुर्रे 'सुवासिता'*


मात-पिता की ही गोदी में ,

हम तो फूल बने रहते हैं ।

दुख सारा हमको ही दे दो, 

वो तो हम को नित कहते हैं ।

मात-पिता को देखे राधे, 

तब तब ही मन में मचलाई ।


*राधा तिवारी "राधेगोपाल"*