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Sunday, 22 September 2019

साजन के संग...सुशीला साहू "शीला"

मेंहदी हाथों में लगवाऊं,
      खुशी के हर पल खिलखिलाऊं।
महावर लागे पांव में हरदम,
       पायल छमके छम छम।
रचे मेंहदी सुन्दर हाथों में लाली,
        जैसे दिखे सुन्दर सी प्याली ।
मन निर्मल रखूं मै प्रतिपल,
       साथ निभाऊं जीवन के हर पल।
मेंहदी लगी है खुशियां अपार,
       तन मन रिझ उठा नयन सुखार।
सखियों के साथ मौज मनाऊं,
        साजन के संग मैं इठलाऊं।
सबके दुख सुख का है ऐहसास,
        पिया के नाम की मेंहदी है मेरे पास।
मेंहदी हाथों की लाली होती,
         महावर पैरों की शोभा बढ़ाती।
माथे पे सजे सुहाग की निशानी,
         सुहाग सिन्दुर चमके बिंदिया रानी।
सुंदर मेंहदी पति को लगे प्यारी,
        लाली चुनरी प्रित मन लागे न्यारी ।

स्वरचित रचना✍️
सुशीला साहू "शीला"
शिक्षिका..
रायगढ़ (छत्तीसगढ़)